शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवताओं का निवास होता है। जहां देवताओं का निवास होता है उस घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इसलिए जरूरी है कि महिलाओं को सम्मान और आदर प्राप्त हो। लेकिन यह तभी संभव है जब आपका घर वास्तु दोष से मुक्त हो।
वास्तु गुरू 'कुलदीप सालूजा' का कहना है कि हम जहां रहते हैं यानी हमारे घर और उसके आस-पास की सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा हमेशा हमारे साथ रहती है। जिस घर में वास्तु दोष होता है उस घर में रहने वालों में जिस व्यक्ति की ग्रह दशा कमज़ोर होती है वह वास्तु के नकारात्मक प्रभाव से पीड़ित होते हैं।
जिन घरों में दक्षिण दिशा में वास्तु दोष होता है उन घरों में रहने वाली महिलाओं को प्रताड़ना और अपमान का सामना करना पड़ता है। दक्षिण दिशा में वास्तु दोष का एक बड़ा कारण है इसका अन्य दिशाओं से नीचा होना। दक्षिण दिशा का वास्तु दोष तब और बढ़ जाता है जब नैऋत्य यानी दक्षिण पश्चिम दिशा अधिक नीचा हो।
दक्षिण नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत जैसे, कुआं, बोरिंग, भूमिगत पानी की टंकी, सैप्टिक टैंक, किसी प्रकार गड्ढ़ा अथवा ढलान होने पर वास्तु दोष महिलाओं के लिए कष्टकारी होता है। नैऋत्य में घर का बढ़ाव, घर का प्रवेशद्वार होने पर भी महिलाओं को अपमानजनक स्थितियों से गुजरना पड़ता है।
अगर दक्षिण नैऋत्य में एक से अधिक वास्तुदोष हों जैसे- दक्षिण नैऋत्य में बढ़ाव व भूमिगत पानी टंकी के साथ-साथ घर का प्रवेशद्वार भी हो तो महिलाओं को गंभीर आपराधिक घटनाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे अपराध की शिकार वह महिलाएं हो जाती हैं जिनकी ग्रह स्थिति कमज़ोर होती है।