मछली और कछुआ दोनों को
ही हिन्दू धर्म में शुभ का प्रतीक माना जाता है। गंदगी में रहने के बावजूद वाराह को
भी यात्रा के समय देखना शुभ माना जाता है क्योंकि भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा
के लिए मछली, कछुआ और वाराह रूप में अवतार लिया था। चीन के वास्तु विज्ञान फेंगशुई
में भी मछली एवं कछुआ को शुभ का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि इन्हें घर में
रखने से आर्थिक उन्नति होती है और घर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता रहता है
जिससे घर में रहने वाले लोगों की सेहत अच्छी रहती है।
इस मान्यता के कारण
बहुत से लोग अक्वेरियम एवं धातु के बने फेंगशुई कछुआ घर में रखते हैं। लेकिन इसके
बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता है। इसका कारण फेंगशुई में यह बताया गया है कि
इन चीजों को रखने का स्थान काफी महत्वपूर्ण होता है। अगर इनके लिए निर्धारित दिशा
में इन्हें नहीं रखा जाए तो इसका लाभ नहीं मिलता है।
फेंगशुई के नियम के
अनुसार कछुआ कभी भी शयन कक्ष में नहीं रखना चाहिए। कछुआ के लिए सबसे बढ़िया स्थान
बैठक घर यानी ड्राईंग रूम होता है। दांपत्य जीवन पर कछुआ का कोई प्रभाव नहीं पड़ता
है इसलिए घर की शोभा बढ़ाने के उद्देश्य से कभी भी दो कछुआ एक साथ घर में नहीं रखना
चाहिए। दो कछुआ साथ होने से लाभ बाधित हो जाता है।
कछुआ के लिए सबसे उत्तम
दिशा उत्तर है। उत्तर दिशा को धन की दिशा माना जाता है। उत्तर के अलावा पूर्व दिशा
की ओर भी कछुआ रख सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि कछुआ का मुंह घर के अंदर
की ओर रहे। बाहर की ओर कछुआ का मुंह होने पर धन जिस तेजी से आता है उसी तेजी से
खर्च भी हो जाता है। कछुआ को सूखे स्थान पर रखने की बजाय किसी बर्तन में पानी भर कर
रखना चाहिए।