शयनकक्ष में कभी भी सामान फैला हुआ नहीं होना चाहिए। कमरे में फैला सामान उदासी, तनाव, बीमारी पैदा करता है। इस बात का ध्यान भी जरूर रखें कि कमरे के अंदर धूल-मिट्टी नहीं जमी होनी चाहिए। कमरे के भीतर हल्के रंग की रोशनी का बल्ब लगाने से मन प्रसन्न रहता है व दिमाग भी शांत रहता है।
आपसी रिश्तों में तनाव का एक बड़ा कारण रसोईघर से भी जुड़ा है। वास्तु के अनुसार, रिश्तों में मिठास बनी रहे इसके लिए सदैव प्रसन्न मन से रसोईघर में प्रवेश करना चाहिए। अगर प्रसन्न मन से भोजन या अन्य खाद्य पदार्थ साथी को नहीं देंगे, तो इससे रिश्ते बिगड़ेंगे ही। रसोईघर में चीखना-चिल्लाना या मारपीट करने जैसी गलती भूलकर भी न करें। यहां साथ बैठकर भोजन करना भी रिश्तों के बीच दूरियां लाता है।
रिश्तों में मिठास बनी रहे, इसके लिए शयनकक्ष के द्वार पर पीले फूलों की माला लगाएं। रोजाना ताजे फूल की माला लगाना संभव न हो, तो आर्टिफिशियल फूल की माला भी लगा सकते हैं। यदि आपके घर में बाथरूम और रसोईघर एक साथ हैं, तो ये भी दूरियां बढ़ाते हैं। इससे जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है और वह हमेशा बीमार रहता है।
घर की उत्तर-पूर्व दिशा में कूड़ेदान बनाने या कूड़ा रखने से भी मन-मुटाव और जलन आदि की भावना पनपती है, इस दिशा में कूड़ेदान भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। घर में होने वाले झगड़ों से छुटकारा पाने के लिए घर को साफ रखें। वास्तु की दृष्टि से घर के उत्तर-पूर्व दिशा को साफ-सुथरा रखना बहुत जरुरी माना जाता है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति बढ़ती है।
अमर उजाला के खुला पन्ने से साभार