साफ-सुथरा, सजा-संवरा घर, जहां खुशियां बसती हों, सदस्यों के बीच तालमेल हो, भविष्य की सकारात्मक योजनाएं हों, उत्साह हो, जीवन हो... ऐसे घर की कल्पना हम सभी करते हैं। लेकिन घर को घर बनाने का प्रयास कुछ लोग ही करते हैं। नया साल आते ही खुद के लिए संकल्प लेते हैं, तो फिर घर के लिए क्यों नहीं लेते कोई संकल्प? घर हमारे लिए सिर्फ ईंट-पत्थरों से बना एक ढांचा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके साथ हमारे आत्मीय संबंध भी होने चाहिए।
चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में कहा है- ‘जहां मूर्खों की प्रशंसा नहीं होती, अनाज को उचित ढंग से संरक्षित किया जाता है, पति-पत्नी में झगड़े नहीं होते, वहीं पर भाग्य की देवी ‘श्री‘ वास करती हैं।’ साल 2018 का आरंभ होने जा रहा है, तो क्यों न हम घर को मजबूत, साफ और सुंदर बनाने के साथ, पारिवारिक सदस्यों के लिए भी कुछ करें। हमारे प्रिय जो हमसे बहुत दूर चले गए हैं, जो हमारे साथ हैं, सभी के जीवन के लिए सकारात्मक संकल्प लें। घर व उसके सदस्यों के मध्य अपनापन का भाव विकसित करें।
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ध्यान दें, दीवारों पर पड़ी दरारें, धब्बे, जाले, टूटी खिड़कियां आपके मन को प्रतिबिबिंत करती हैं। इसलिए सबसे पहले दरारों को भरवाएं। टूट-फूट ठीक कराएं। सामर्थ्य के अनुसार, घर में रंग-रोगन कराएं।यदि बच्चों की शिक्षा, बुद्धिमानी, युवावस्था के विकास को अच्छा रखना है, तो पूर्व दिशा को ठीक रखने का संकल्प लें। यहां पर देवराज इंद्र का प्रभाव रहता है। इस दिशा में मेष और वृष राशि तथा शुक्र का प्रभाव होता है। बच्चों के शयनकक्ष तथा कमरे को बल देना है, तो इंद्र से जुड़ी चीजें जैसे हाथी, डायमंड, क्रिस्टल या सफेद रंग का घोड़ा लगाएं। यहां सफेद या हरे रंग का प्रयोग करें।