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Vastu Tips: खूब धन लाभ के लिए फैक्ट्री बनाने में अपनाएं ये वास्तु के नियम

Sat, 25 Jun 2022 12:12 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

वास्तु शास्त्र के अनुसार फैक्ट्री की भूमि के पूर्व,उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर मुख्यद्वार रखना चाहिए। वहीं छोटा द्वार उत्तर-पश्चिम में रखा जा सकता है। यदि मुख्य द्वार पूर्व में है तो संतरी की कोठरी फाटक के दक्षिण-पूर्व में होनी चाहिए।
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फैक्ट्री बनाने के बाद आपको उससे धन लाभ हो इसके लिए कुछ वास्तु नियमों का पालन करना आवश्यक है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिस प्रकार हम घर बनवाते समय वास्तु नियमों का पालन कर उसका लाभ उठाते हैं,ठीक उसी प्रकार फैक्ट्री निर्माण में भी वास्तु सिद्धांतों का पालन करना चाहिए,जिससे उस स्थान पर पंचतत्वों का ठीक से समन्वय हो और उसका लाभ मालिक को मिल सके। फैक्ट्री निर्माण करते समय वास्तु नियमों की अवेहलना करना नुकसान का कारण हो सकता है। फैक्ट्री बनाने के बाद आपको उससे धन लाभ हो इसके लिए कुछ वास्तु नियमों का पालन करना आवश्यक है।

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ऐसा हो भूखंड
फैक्ट्री का निर्माण आर्थिक समृद्धि के लिए किया जाता है अतः इसके लिए सिंह मुखी जमीन (जिसका आगे का भाग चौड़ा हो और पीछे की तरफ चलने पर सकरा होता जाए) अत्यंत लाभप्रद मानी जाती है।

बाउंड्रीवाल
फैक्ट्री जिस भूखंड पर लगाईं जाए उसके चारों ओर बनी बाउंड्री वाल पश्चिम एवं दक्षिण की तुलना में पूर्व और उत्तर दिशा की तरफ नीची एवं अपेक्षाकृत हल्की होनी चाहिए यानि दक्षिण-पश्चिम में निर्माण अधिक भारी हो।
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ऐसा हो मुख्यद्वार
वास्तु शास्त्र के अनुसार फैक्ट्री की भूमि के पूर्व,उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर मुख्यद्वार रखना चाहिए। वहीं छोटा द्वार उत्तर-पश्चिम में रखा जा सकता है। यदि मुख्य द्वार पूर्व में है तो संतरी की कोठरी फाटक के दक्षिण-पूर्व में होनी चाहिए। यदि द्वार उत्तर की ओर है तो संतरी की कोठरी फाटक के उत्तर-पश्चिम में होनी चाहिए।

उत्तर-पूर्व दिशा है महत्वपूर्ण
भूखंड का ईशान कोण कभी भी कटा हुआ नहीं होना चाहिए वास्तु में इसको अशुभ माना गया है और न ही वहां किसी भी तरह का भारी-भरकम सामान रखा होना चाहिए। पानी की व्यवस्था जैसे बोरिंग या अंडरग्राउंड टैंक ईशान कोण में बनाना लाभप्रद रहता है परंतु ओवरहैड पानी की टंकी सदैव नैऋत्य कोण में ही रखना उपयुक्त है। इस दिशा में शौचालय का निर्माण भूलकर भी नहीं करें।

बिजली की चीजें यहां हों
फैक्ट्री में उपयोग आने वाले बायलर, ट्रांसफार्मर, चिमनी,जनरेटर,बिजली या टेलीफोन का खम्बा,बिजली का मीटर,गैस या बिजली से चलने वाला कोई भी उपकरण आदि की व्यवस्था सदैव अग्नि की दिशा,आग्नेय कोण में की जानी चाहिए।

अन्य टिप्स
फैक्ट्री की बाउंड्री वाल से एक फीट दूर हटकर आग्नेय या वायव्य कोण के भाग में शौचालय बनाए जा सकते हैं,वहीं वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था उत्तर-पश्चिम या आग्नेय कोण में की जा सकती है। फैक्ट्री के दक्षिण भाग में भारी मशीनें या भारी सामान रखा जाना चाहिए। उत्तरी भाग में हल्की मशीनें,उत्तर दिशा में कच्चा और आधा बना हुआ माल और बिकने के लिए तैयार माल को वायव्य कोण में रखा जाना उपयुक्त होता है। प्रशासनिक विभाग के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को अच्छी माना गया है। मालिक,अधिकारी और कर्मचारी भी काम करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। फैक्ट्री स्वामी की कुर्सी के पीछे खिड़की नहीं होनी चाहिए,ऐसा होने से मालिक का आत्मविश्वास कम हो सकता है। फैक्ट्री के अंदर खुली जगह में वृक्ष लगाने से पूर्व ध्यान रखें कि दक्षिण ओर पश्चिम भाग में बड़े वृक्ष एवं पूर्व या उत्तर में घास का लॉन एवं छोटे फूलों वाले वृक्ष लगाए जाने चाहिए। भूखंड के ब्रह्मस्थान पर कोई भारी सामान या मशीनरी नहीं रखनी चाहिए अन्यथा मालिक आर्थिक दबाब में रहेगा।

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