अमूमन किसी फिल्म की सफलता का पैमाना उसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन माना जाता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा जाता है कि किसी फिल्म की सफलता का कोई सूत्र नहीं होता है। एक बड़े बजट की फिल्म असफल और एक छोटे बजट की फिल्म हिट हो सकती है। सितारों से सजी फिल्म मायूस कर सकती है और बिल्कुल नये कलाकारों से साथ बनी फिल्म दिलों दिमाग पर छा सकती है। कभी कठिन परिश्रम के साथ बनाई फिल्म को दर्शक नकार देते हैं और कभी सामान्य श्रम से निर्मित फिल्म कालजयी असर छोड़ देती है। कभी पूर्वानुमान कम पड़ जाते हैं और कभी अपेक्षित परिणाम भी नहीं आ पाते है। क्या है इन सबके पीछे का कारण? क्यों होती है एक फिल्म सफल और दूसरी असफल? बड़ा सवाल यह भी है कि किसी फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को कैसे बढ़ाया जाये?
मुहूर्त का रखें ध्यान
किसी भी फिल्म के निर्माण से लेकर रिलीज होने तक में मुहूर्त का काफी महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। मुहूर्त से बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का गहरा संबंध देखा गया है। अच्छे मुहूर्त के लिये किसी योग्य विद्वान से सलाह ली जा सकती है। मुहूर्त के अतिरिक्त देश, काल, वातावरण की परिस्थितियाँ भी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को प्रभावित करती है। किन्तु इन सब के अतिरिक्त कुछ अन्य कारक भी ध्यान देनें योग्य होते है जिन्हें अक्सर नज़र अंदाज कर दिया जाता है।
शुक्र दिलाता है सफलता
जब एक फिल्म बनती है और रिलीज होती है तो उसमें शुक्र का मजबूत होना आवश्यक है। क्योंकि शुक्र विलासिता और मनोरंजन का कारक है। शुक्र की स्थिति से फिल्म का वैभव, बजट, फिल्म का वितरण और दर्शकों का रुख प्रभावित होता देखा जाता है। शुक्र की अनुकूलता बनी रहे इसलिये इतना अवश्य होता है कि फिल्म की रिलीज का वार शुक्रवार रखा जाता है। शुक्र प्रति माह अपनी राशि बदलता है इसलिये हमेशा शुक्र की अनुकूल राशि संभव नहीं हो पाती है। ऐसी स्थिति में फिल्म के मुहूर्त, क्लाईमेक्स की सूटिंग और रिलीज के समय जितना संभव हो सके शुक्र की अनुकूलता का ध्यान रखा जाना चाहिये।
मंगल बढ़ाएगा मान
फिल्मों में मंगल का भी अत्यंत महत्व है। मंगल की अनुकूल स्थिति से भारतीय फिल्म उद्योग को विदेशों में अच्छा व्यापार मिलेगा। इसी तरह भाषा विशेष की फिल्म को अन्य भाषा क्षेत्र में भी सम्मान मिलता है। मंगल के प्रभाव से एक्शन फिल्में व बड़े बजट की फिल्में दर्शकों को अधिक पसंद आयेंगी। इसलिये फिल्म निर्माण के मुहूर्त, ऐक्शन दृश्यों की सूटिंग और रिलीज के समय मंगल की अनुकूलता पर अवश्य विचार किया जाना चाहिये।
बुध से बनेगी ये बात
बुध की स्थिति फिल्म के वितरण को प्रभावित करती है। इसी के साथ बुध की स्थिति से ही यह अनुमान लगाया जाता है कि एक सिनेमा हॉल में कितने प्रतिशत सीटें भरी रहने और कितने प्रतिशत सीटें खाली रहने की संभावना है। बुध से फिल्म की लागत निकलने की संभावना के बारे में अनुमान लगाने में सहायता ली जाती है। यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रतिवर्ष 5 से 6 बार बुध अस्त हो जाता है। सभी बुध का अस्त होना ना तो सदैव नकारात्मक होता है और ना ही सदैव सकारात्मक, बल्कि बुध के अस्त होने पर उसकी राशि के साथ अन्य ग्रहों के सापेक्ष गणना अधिक लाभदायक रहती है।