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Surya Gochar 2025: सूर्य का कन्या राशि में गोचर, जानिए कर्क राशि पर कैसा रहेगा प्रभाव ?

Tue, 16 Sep 2025 04:21 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Surya Gochar 2025: सूर्य का राशि परिवर्तन कर्क राशि वालों के लिए मिलाजुला साबित होगा। कर्क राशि के जातकों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होते हैं। सूर्य का कन्या राशि में गोचर आपके तीसरे भाव में होगा।
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सूर्य का राशि परिवर्तन - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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Surya Gochar 2025: सूर्यदेव अब कन्या राशि में गोचर करेंगे। पंचांग की गणना के अनुसार सूर्य देव 17 सितंबर को अपनी स्वराशि सिंह की यात्रा को पूरा करते हुए बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव को ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत, आत्मा, पिता और मान-सम्मान में कारक माना जाता है। इसके अलावा सूर्य व्यक्ति के अधिकार, आत्मविश्वास, इच्छाशाक्ति को नियंत्रित करता है। सूर्य के कुंडली में मजबूत होने पर व्यक्ति को बेहतरीन नेतृत्व क्षमता में विकास होता है। सरकारी क्षेत्रों में मान-सम्मान में वृद्धि होती है।  वहीं जिन जातकों की कुंडली में सूर्य कमज होते हैं उनके आत्मविश्वास में कमी का सामना करना पड़ता है। सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रभाव देश-दुनिया के साथ-साथ सभी सभी राशियों के ऊपर भी देखने को मिलता है। आइए जानते हैं सूर्य के कन्या राशि में गोचर करने से कर्क राशि वालों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा। 
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कर्क राशि पर सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रभाव
सूर्य का राशि परिवर्तन कर्क राशि वालों के लिए मिलाजुला साबित होगा। कर्क राशि के जातकों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होते हैं। सूर्य का कन्या राशि में गोचर आपके तीसरे भाव में होगा। जिससे आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। लेकिन इस दौरान आपके काम में तरह-तरह की रुकाटें आती हैं। जो लोग नौकरी में बदलाव लाना चाह रहे हैं उनको करियर में थोड़ा संभलकर चलना होगा। आपकी योजनाएं बहुत ही काम होंगी। 
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ज्योतिष में सूर्य

  1. - सूर्यदेव को पूर्व दिशा का स्वामी माना गया है। 
  2. - सूर्यदेव तांबे और सोने के स्वामी होते हैं। 
  3. - वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जन्म कुंडली में पिता, मान-सम्मान, लीडरशिप, राजकाज और उच्च प्रशासिनक पद के कारक होते हैं।
  4. - किसी पुरुष की कुंडली में सूर्य से पिता और महिला की कुंडली में पति के बारे में जानकारी प्राप्ति होती है। 
  5. - सूर्य की महादशा 6 वर्षों तक रहती है। 
  6. - सूर्य उपासना के लिए रविवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है।
  7. - सूर्य सिंह राशि के स्वामी होते हैं।
  8. - सूर्य मेष राशि में उच्च के जबकि तुला राशि में नीच के होते हैं। 
  9. - जातक की कुंडली में सूर्य लग्न में हो तो व्यक्ति का चेहरा बड़ा और गोल आकार का होता है। सूर्य पुरुषों में दायं आंख और महिलाओं की बायीं आंख को बताता है। 
  10. - कालपुरुष की कुंडली में सूर्य ह्रदय को दर्शाता है। 
  11. - सूर्य का रत्न माणिक्य होता है। 
  12. - मेष राशि में सूर्य 10 अंश के होने पर ये परम उच्च के हो जाते हैं, जबकि तुला राशि में 10 अंश के होने पर नीच के हो जाते हैं। 
  13. - मकर से मिथुन राशि के भ्रमण दौरान सूर्य उत्तरायन होते हैं।
  14. - कर्क से धनु राशि के भ्रमण के दौरान दक्षिणायन सूर्य होते हैं।

कुंडली में सूर्य जब पीड़ित होता है

  •  अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य पीड़ित है तो व्यक्ति को ह्रदय और आंखों संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
  •  सूर्य अगर शनि देव के प्रभाव के कारण पीड़ित होते हैं तो व्यक्ति को कम बल्ड प्रेशर से संबंधित समस्याएं आती हैं। अगर गुरु से पीड़ित होता है तो उच्च ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी देखने को मिलती है। 

कुंडली में सूर्य जब बली होता है। 

  • कुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं तो जातक को जीवन में हमेशा शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। व्यक्ति अच्छे कार्य करते उच्च पद पर आसीन होती है। ऐसे जातकों पर स्वयं पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है। 
  • कुंडली में सूर्य जब उच्च के, अच्छे भाव में, शुभ ग्रहों की द्दष्टि में और अपने मित्र ग्रह की राशि में होते हैं तो जातक को बहुत ही अच्छा फल देते हैं। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अच्छा होता है व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला और समाज में सम्मानित होता है। सूर्य राजा, उच्च पद और स्थायित्व का कारक होता है।

 
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