Surya Gochar 2025: मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी होते हैं। अब जब सूर्य का राशि परिवर्तन 17 सितंबर को कन्या राशि में होगा तो यह आपकी कुंडली छठे भाव में प्रवेश करेंगे।
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Surya Gochar 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सभी नवग्रहों में राजा का पद प्राप्त है। सूर्य आत्मा, ज्ञान, ऊर्जा और नेतृत्व के कारक होते हैं। सूर्य किसी एक राशि में करीब एक महीने तक रहते हैं, जिससे बाद ये अगली राशि में प्रवेश कर जाते हैं। सूर्य के गोचर को सक्रांति के नाम से जाना है जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव का प्रभाव जातक के करियर, पिता और मान-सम्मान पर पड़ता है। जिन जातकों की कुंडली में सूर्यदेव मजबूत स्थिति में होते हैं उस व्यक्ति का करियर, मान-सम्मान, महत्वकांक्षा और नेतृत्व क्षमता अच्छी रहती है, वहीं जिन जातकों की कुंडली में सूर्यदेव कमजोर होते हैं। या फिर पाप ग्रहों से पीड़ित होते हैं उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी और जीवन में मान-सम्मान में गिरावट देखने को मिलती है।
सूर्यदेव करीब 30 दिनों के अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं। ऐसे में 17 सितंबर 2025 को सूर्यदेव रात 01 बजकर 38 मिनट पर कन्या राशि में गोचर करने वाले हैं। सूर्य के गोचर से देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं सूर्य के गोचर से मेष राशि पर किस तरह का प्रभाव रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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मेष राशि
- फोटो : अमर उजाला
मेष राशि पर सूर्य के गोचर का प्रभाव
मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी होते हैं। अब जब सूर्य का राशि परिवर्तन 17 सितंबर को कन्या राशि में होगा तो यह आपकी कुंडली छठे भाव में प्रवेश करेंगे। कुंडली का छठा भाव अच्छा नहीं माना जाता है। यह भाव शत्रुओं, कर्जों और रोगों का होता है। इस भाव में सूर्य के गोचर का प्रभाव अच्छा रहेगा क्योंकि सूर्य को क्रूर ग्रह भी माना जाता है जिससे कन्या राशि में गोचर करने से यह आपकी तरक्कती और सफलता के लिए अच्छा रहेगा। कामयाबी के अवसरों में वृद्धि होगी। जो लोग नौकरीपेशा हैं उनके लिए वेतन में वृद्धि के योग हैं वहीं जो खुद का व्यापार करते हैं उनके लिए सूर्य का कन्या राशि में गोचर करना मुनाफे में वृद्धि दिलाएगा। इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। पैतृक संपत्ति से आपको अच्छा लाभ हो सकता है।
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ज्योतिष में सूर्य ग्रह का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष में सूर्य
- सूर्यदेव को पूर्व दिशा का स्वामी माना गया है।
- सूर्यदेव तांबे और सोने के स्वामी होते हैं।
- वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जन्म कुंडली में पिता, मान-सम्मान, लीडरशिप, राजकाज और उच्च प्रशासिनक पद के कारक होते हैं।
- किसी पुरुष की कुंडली में सूर्य से पिता और महिला की कुंडली में पति के बारे में जानकारी प्राप्ति होती है।
- सूर्य की महादशा 6 वर्षों तक रहती है।
- सूर्य उपासना के लिए रविवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है।
- सूर्य सिंह राशि के स्वामी होते हैं।
- सूर्य मेष राशि में उच्च के जबकि तुला राशि में नीच के होते हैं।
- जातक की कुंडली में सूर्य लग्न में हो तो व्यक्ति का चेहरा बड़ा और गोल आकार का होता है। सूर्य पुरुषों में दायं आंख और महिलाओं की बायीं आंख को बताता है।
- कालपुरुष की कुंडली में सूर्य ह्रदय को दर्शाता है।
- सूर्य का रत्न माणिक्य होता है।
- मेष राशि में सूर्य 10 अंश के होने पर ये परम उच्च के हो जाते हैं, जबकि तुला राशि में 10 अंश के होने पर नीच के हो जाते हैं।
- मकर से मिथुन राशि के भ्रमण दौरान सूर्य उत्तरायन होते हैं।
- कर्क से धनु राशि के भ्रमण के दौरान दक्षिणायन सूर्य होते हैं।
अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य पीड़ित है तो व्यक्ति को ह्रदय और आंखों संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सूर्य अगर शनि देव के प्रभाव के कारण पीड़ित होते हैं तो व्यक्ति को कम बल्ड प्रेशर से संबंधित समस्याएं आती हैं। अगर गुरु से पीड़ित होता है तो उच्च ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी देखने को मिलती है।
कुंडली में सूर्य जब बली होता है।
कुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं तो जातक को जीवन में हमेशा शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। व्यक्ति अच्छे कार्य करते उच्च पद पर आसीन होती है। ऐसे जातकों पर स्वयं पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है।
कुंडली में सूर्य जब उच्च के, अच्छे भाव में, शुभ ग्रहों की द्दष्टि में और अपने मित्र ग्रह की राशि में होते हैं तो जातक को बहुत ही अच्छा फल देते हैं। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अच्छा होता है व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला और समाज में सम्मानित होता है। सूर्य राजा, उच्च पद और स्थायित्व का कारक होता है।