Surya Arghya
सूर्य के रथ पर ये देवता होते हैं सवार
बसंत ऋतु की यात्रा के समय दो देवता - विष्णु और विश्कर्मा, दो ऋषि - जमदग्नि और विश्वामित्र, दो नाग - काद्रवेय और कम्बलाश्वतर सूर्य के ही रथ पर निवास करते हैं। सूर्यवर्चा और धृतराष्ट नामक दो गन्धर्व, अपनी सुंदरता से मन का हरण कर लेने वाली तिलोत्तमा और रम्भा नाम की दो अप्सराएं भी सूर्य की इस यात्रा में साथ चलती हैं। इनके साथ ऋतजित और सत्यजित दो महाबलवान सारथी तथा ब्रह्मोपेत और यज्ञोपेत नामक दो राक्षस निवास करते हैं।
ये सभी देवतागण आदि अपने अतिशय तेज से सूर्य को अतिशय तेजों वाला बनाते हैं। ऋषिगण अपने बनाए गये वाक्यों से सूर्यदेव की स्तुति करते हैं। इस प्रक्रार अपने रथ पर चलते हुए सूर्य सातों द्वीपों और सातों समुद्रों समेत सृष्टि का भ्रमण करते हुए दिन-रात्रि का निर्माण करते हैं। इन्हीं के द्वारा क्षण, मुहूर्त, दिन, रात्रि, पक्ष, मास, दिन, अयन, वर्ष, तथा युग आदि का काल-विभाग होता है।