ग्रहण के दौरान क्या करें?
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दिन और ग्रहण काल के समय तप, दान, जप, प्रार्थना आदि कर्म उत्तम माने गये हैं। यहां तप का अर्थ व्रत, संकल्प है। प्रातः दिन के भोजन से पहले, तुलसी के पत्ते तोड़कर अपने रसोईघर में रख लें और भोजन के समय प्रयोग करें। इसका एक मात्र उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और शुद्धता से है।
ग्रहण काल में जितना संभव हो गायत्री मंत्र, सूर्य के अन्य मंत्र, आदित्य हृदयस्तोत्र, हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम, नारायण कवच आदि का मानसिक जाप करें, ये मंत्र सिद्धि का पर्व माना जाता है। व्रत करें, व्रत या संकल्प तीन प्रकार के होते हैं, शारारिक ( सात्विक, मौसम के अनुसार भोजन, प्रकृति के अनुसार दिनचर्या ), वाचिक (सत्य मधुर वाणी, मौन, निंदा, उपहास, कटु वचन, आलोचना न बोलना) और मानसिक ( क्रोध, निराशा, उत्तेजना, घृणा, ईर्ष्या, आलोचना, इन्द्रियों, और मन को नियंत्रित करने के लिए ध्यान, जप योग)