ज्योतिष शास्त्र में शनि को एक बहुत ही प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं, जिसके कारण इनका शुभ या अशुभ प्रभाव जातकों के ऊपर काफी लंबे समय तक होता है। ज्योतिष में शनि देव आयु, दुख, तकनीकी, सेवक और खनिज तेल आदि का कारक माना जाता है। शनि अगर जातक की कुंडली में शुभ स्थिति में हैं तो व्यक्ति को रंक से राजा बना देते हैं लेकिन वहीं अगर शनि की स्थिति कुंडली में खराब है तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. शनिदेव कब प्रसन्न होते हैं इसके दो कारण होते हैं पहला जब आपकी कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में हों तो शनिदेव आपके ऊपर प्रसन्न हैं, वहीं दूसरा अगर आप अच्छे कर्म करते हैं तो शनि आपके ऊपर जल्दी प्रसन्न होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में शनि के द्वारा कुछ ऐसे योग बनते हैं जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। जिसमें से एक योग शश योग होता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस शश योग के बारे में...
कुंडली में शनि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह होते हैं। ये तुला राशि में उच्च के और मेष राशि में नीच के होते हैं। कुंडली का ग्यारहवां भाव शनि का अपना घर होता है।
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कुंडली में कब बनता है शश योग
ज्योतिष शास्त्र में पंचमहापुरुष योग को बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। शश योग इसी पंचमहापुरुष योग में से एक होता है। शनि के कारण शश योग का निर्माण होता है। अगर किसी जातक की जन्म कुंडली में शनि लग्न से अथवा चंद्रमा से केंद्र के भाव में स्थिति हो तो शश योग बनता है। शनि लग्न में या फिर चंद्रमा से पहले, चौथे, साववें और दसवें घर में तुला, मकर या कुंभ राशि में स्थिति हो तो शश योग बनता है। इस तरह से शनि लग्न से या चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें और दसवें घर में शनि की खुद की राशि या उच्च में मौजदू होता है शश योग बनता है।
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शश योग के फायदे
- कुंडली में इस योग के बनने पर जातक बीमारियों से जल्दी उबर जाता है।
- इस योग के बनने पर जातक की आयु लंबी होती है।
- ऐसे लोग व्यापार में अच्छी सफलता हासिल करते हैं।
- जिन लोगो की कुंडली में शश योग बनता है वे बहुत ही ज्ञानी होते हैं।
- कुंडली में शश योग बनने पर जातक को शनि के बुरे प्रभाव, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है।