अब नया साल 2026 शुरू होने में काफी कम दिन शेष हैं। नए साल ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि नया साल ग्रहों और नक्षत्रों की चाल बदलती है जिसका व्यापक असर देश-दुनिया के साथ-साथ हर सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलता है। ज्योतिष में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनि की चाल सभी ग्रहों में सबसे मंद होती है जिसके कारण इसका शुभ और अशुभ दोनों ही तरह का असर काफी लंबे वक्त तक होता है। शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं फिर इसके बाद ही दूसरी राशि में गोचर करते हैं। आपको बता दें शनि अभी गुरु के स्वामित्व वाली राशि मीन में हैं संचरण कर रहे हैं और साल 2026 में भी इसी राशि में विराजमान रहेंगे। इस दौरान शनि कुछ समय के लिए वक्री और मार्गी भी होंगे साथ ही अस्त और उदय भी होंगे। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2026 में किन राशियों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या रहेगा।
साल 2026 में इन राशियों पर रहेगी साढ़ेसाती
साल 2026 में तीन राशियों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष, मीन और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव रहेगा। मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण, मीन राशि पर दूसरा और कुंभ राशि पर अंतिम चरण रहेगा। ऐसे में साल 2026 में इन तीन राशि वालों को ज्यादा सावधान रहना होगा। धन का अभाव बना रहेगा। मानसिक परेशानियों में वृद्धि होगी। धन प्राप्ति के मौके कम मिलेंगे और नौकरी में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। जरूरी मामलों में कोई भी निर्णय बहुत ही सोच समझकर करना होगा।
साल 2026 में इन राशियों पर ढैय्या
साल 2026 में शनि का मीन राशि में संचरण करने से धनु और सिंह राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव रहेगा। ऐसे में आपको साल 2026 में नौकरी से लेकर सेहत के मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान आपका कोई धन फंस सकता है। आपके फिजूलखर्चों में इजाफा हो सकता है।
शनिदोष खत्म करने के उपाय
छाया दान
शनि ग्रह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए और शनि की साढ़ेसाती, ढैया या शनि की किसी भी प्रकार की पीड़ा से बचने के लिए छाया दान करना खास होता है। इस दिन एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं।
शनि मंत्रों का जाप करें
शनि मंत्रों का जाप किसी की राशि में शनिदेव के साढ़ेसाती काल के प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है। इस दिन ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ और ‘ॐ शं शनिश्चरायै नमः’ इन दो मंत्रों का यथा शक्ति जाप करें। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि चालीसा और शनिदेव की आरती भी करें।
हनुमानजी की पूजा
शनिदेव, हनुमानजी की पूजा करने वालों से सदैव अपनी कृपा दृष्टि रखते हैं, इसलिए इनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए।