वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे अहम और शक्तिशाली ग्रह माना गया है। शनि न्याय, कर्म, मेहनत, पीड़ा, कष्ट, संघर्ष और धैर्य के कारक ग्रह होते हैं। सभी नवग्रहों में कर्मफलदाता शनि सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, इस तरह से सभी 12 राशियों का एक चक्कर को पूरा करने के लिए शनि 30 वर्ष का समय लेते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए होते हैं क्योंकि यहीं एकमात्र ग्रह हैं जिनके पास साढ़ेसाती और ढैय्या है। हर एक जातकों के जीवन में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का व्यापक असर पड़ता है।
आमतौर पर शनि का नाम आते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि शनि की टेढ़ी नजर न पड़ जाए, लेकिन शनि एक न्यायप्रिय ग्रह हैं जो लोगों को उनके कर्मों के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार की द्दष्टि अगर किसी पर पड़ जाय तो उसका कुछ न कुछ अनिष्ट जरूर होता है। शनि को मकर और कुंभ राशि का स्वमित्व प्राप्त है। ये तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि की बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रहती है जबकि सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका शत्रुवत व्यवहार होता है। जबकि देवगुरु बृहस्पति और केतु से इनका संबंध सम रहता है।
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आपको बता दें कि न्याय के देवता शनि इस साल 29 मार्च को अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ से निकलकर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। शनि के मीन राशि में गोचर करने से कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कंटक शनि की पनौती से छुटकारा मिल जाएगा वहीं कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाएगी। शनि के गोचर करने से सभी 12 राशियों पर कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा। आइए जानते हैं शनि के राशि परिवर्तन का मेष राशि पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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मेष राशि पर शनि के गोचर का प्रभाव
शनि का राशि परिवर्तन जब मीन राशि में होगा तब मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। मेष राशि के जातकों के लिए शनिदेव दशम और एकादश भाव के स्वामी होकर यह आपके 12वें भाव में प्रवेश करेंगे। इस तरह से आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव शुरू हो जाएगा। द्वादश भाव में शनि के होने से यह आपके दूसरे, छठे और नवम भाव भाव पर अपनी तीनों द्दष्टियां डालेंगे। ऐसे में मेष राशि जातकों को लिए लंबी-लंबी यात्राएं शुरू हो जाएंगी। विदेश यात्राओं के होने से आपके विदेश जाने की इच्छाएं पूरी होंगी लेकिन इसी के साथ आपके धन अधिक खर्च होंगे।
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ऐसे में आपको अपने खर्चों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इसी के साथ आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आंखों और पैरों से संबंधित परेशानियां आ सकती हैं। इसके अलावा जो लोग व्यापार करते हैं और उनका व्यापार किसी न किसी रूप में विदेश से संबंधित हैं उनको धन प्राप्त हो सकता है। वहीं जब शनि जुलाई से नवंबर के बीच वक्री होंगे तब कुछ समस्याएं और अधिक बढ़ सकती हैं। ऐसे में शनि के गोचर से मेष राशि के जातकों को सावधान रहना होगा।