शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय
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Shani Dev Ko Prasann Karne Ke Upay: शनिदेव बीते 15 नवंबर 2024 को अपनी स्वराशि कुंभ में रहते हुए मार्गी हुए हैं। आपको बता दें शनिदेव 30 जून से कुंभ राशि में वक्री चाल से चल रहे थे,जो अब 139 दिन बाद अपनी चाल बदली है। शनि 29 मार्च 2025 तक कुंभ राशि में ही रहेंगे ,फिर इसके बाद राशि परिवर्तन करते हुए मीन राशि में गोचर होंगे। जहां पर यह फरवरी 2028 तक रहेंगे। मान्यता है कि, अगर शनि आपसे प्रसन्न रहते हैं तो आपके जीवन की कई समस्याओं का अंत हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लौंग के कुछ उपाय भी आपको शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। लौंग से जुड़े इन उपायों को करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो उपाय।
शनि देव को इन उपायों से करें प्रसन्न
- शनिवार के दिन शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें दो लौंग डालें। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे ही शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए। इस उपाय से आपके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और आपको धन लाभ भी प्राप्त होगा।
- शनिवार की रात सोते समय अपने सिरहाने दो लौंग रख दें। इसके बाद अगले दिन उस लौंग के जोड़े को शिवलिंग पर अर्पित कर दें। इस उपाय को करने से शनि देव की कृपा आप पर बरसती है। आपके बिगड़ते काम भी बनने लगते हैं। यह उपाय आपको कम से कम 7 शनिवार तक अवश्य करना चाहिए।
- यदि आप आर्थिक रूप से परेशान हैं और आपके पास धन नहीं रुक पाता है या आप कर्ज में डूबे हुए हैं तो शनिवार से शुरू करके लगभग एक हफ्ते तक कपूर की टिकिया के साथ 2 लौंग जलानी है। इस उपाय को करते समय शनि देव का ध्यान करते रहें। माना जाता है कि यह उपाय करने से धन से जुड़ी सभी समस्याओं समाप्त होती है। आपकी आर्थिक स्थिति इस उपाय को करने के बाद धीरे-धीरे सुधरने लगती है।
- शनिवार के दिन आपको सरसों के तेल का दीपक जलाकर उसमें 3 लौंग डाल देनी चाहिए। अगर आपके घर के आसपास पीपल का पेड़ है तो इस जलते हुए दीपक को उस पेड़ तले रख के आ जाएं। अगर पीपल का पेड़ पास नहीं है तो बाती को पूरा जलने के बाद दीपक को अगले दिन पीपल के पेड़ के पास रख के आ जाएं। यह उपाय करने से शनि देव तो प्रसन्न होते ही हैं, साथ ही हर प्रकार की पीड़ा से आपको मुक्ति मिलती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।