वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर एक व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों और नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है। ग्रह व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जिस समय किसी जातक का जन्म होता है उसी समय व्यक्ति की कुंडली का निर्माण ग्रहों की चाल के आधार पर तय हो जाता है। कुंडली में ग्रहों की स्थितियों के आधार पर व्यक्ति के जीवन में सुख, दुख, उतार-चढ़ाव समेत जीवन के कई पहलुओं पर प्रभाव रहता है। कुंडली में व्यक्ति के नौकरी और जॉब से संबंधित कई ग्रह मौजूद होते हैं जिससे सफलता और असफलताएं तय होती हैं। अगर कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर है तो व्यक्ति को नौकरी मिलने में या फिर नौकरी में प्रमोशन के मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं इसके उलट अगर कुंडली में ग्रह मजबूत स्थिति में हो तो व्यक्ति करियर में खूब तरक्की करता है। आइए जानते हैं नौकरी और प्रमोशन में कौन सा ग्रह मजबूत है और नौकरी का संबंध कुंडली के किस भाव से होता है।
नौकरी और प्रमोशन में इन ग्रहों का प्रभाव
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी जातक की नौकरी और प्रमोशन में सूर्य और गुरु ग्रह की विशेष भूमिका होता है। अगर किसी जातक की कुंडली में यह ग्रह मजबूत स्थिति हो तो उसे अच्छी नौकरी और प्रमोशन मिलता है। उच्च स्तर वाली नौकरी और लगातार प्रमोशन के लिए बुध, शनि और मंगल ग्रह की शुभ स्थिति बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सूर्य ग्रह
अच्छी नौकरी और प्रमोशन के लिए कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होनी चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है उनके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता होती है और ये लोग अपने कार्यक्षेत्र में बॉस की भूमिका निभाते हैं।
मंगल ग्रह
जिन लोगों की कुंडली में मंगल मजबूत स्थिति में होता है ऐसे लोग अपने कार्यक्षेत्र में रुतबे के बल पर उच्च से उच्च स्तर की नौकरी और मान-सम्मान की प्राप्ति करता है। ऐसे जातकों का वर्चस्व अपने कार्यक्षेत्र में हमेशा ऊंचा बना रहता है।
शनि ग्रह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौकरी का कारक ग्रह शनि भी होता है। शनि न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं और यह सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। अगर किसी जातक की कुंडली में यह ग्रह कमजोर स्थिति में हैं तो नौकरी में तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन शनि अगर शुभ स्थिति में हो तो जातक को नौकरी में अच्छा मुकाम भी हासिल करवा देते हैं।
बुध ग्रह
बुध को ग्रहों का राजकुमार का दर्जा मिला हुआ है। बुध वाणी, संचार, बुद्धि, व्यापार और धन के कारक होते हैं। कुंडली में बुध की शुभ स्थिति होने पर जातक अपने करियर में खूब आगे बढ़ता है और अच्छा खासा मान-सम्मान को प्राप्त करता है।
कुंडली के इन भावों का संबंध नौकरी से
- कुंडली का दशम भाव जो केंद्र का भाव होता है उससे जातक के करियर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। कुंडली के दसवें भाव से यह पता होता है कि जातक को नौकरी कैसी मिलेगी, प्रमोशन कब मिलेगा और कब-कब नौकरी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- अगर कुंडली के दशम भाव के स्वामी का संबंध लग्नेश से होता हो तो जातक को नौकरी में किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे जातक बहुत ही कम उम्र में करियर के शिखर तक पहुंचता है। वहीं अगर कुंडली के दशम भाव में पाप ग्रह के होने के कारण व्यक्ति की नौकरी स्थायी नहीं होती है।
- इसके अलावा अगर कुंडली के दशम भाव में पापी ग्रह राहु-केतु या मंगल जैसे ग्रह हो तो व्यक्ति की नौकरी कई बार छूटती है।
- कुंडली के दशम भाव में अगर सूर्य या गुरु ग्रह मौजूद हो तो व्यक्ति अच्छी नौकरी करता है। ऐसे जातकों को बड़ी ही आसानी के साथ प्रमोशन मिलता है।
- अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य और गुरु दोनों ही शुभ हो, उच्च स्थिति में हो तो जातक नौकरी उच्च स्तर की मिलती है।