इस साल नाग पंचमी पर उदय कालिक कुंडली में राहु-केतु कर्कोटक नाम का कालसर्प योग बन रहा है। जिसके के चलते नाग पंचमी का महत्व और अधिक हो गया है। कालसर्प दोष होने पर नागपंचमी के दिन पूजा करने पर कुंडली से यह दोष दूर हो जाता है। नागपंचमी की पूजन के अलावा इस दिन रुद्राभिषेक करने से भी कुंडली का कालसर्प दोष दूर हो जाता है।
दूसरी बार 15 अगस्त के दिन मनेगी नागपंचमी
38 साल के बाद दोबारा 15 अगस्त आजादी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार नागपंचमी को हस्त नक्षत्र, साध्य योग और चंद्रमा के कन्या राशि में रहते मनाई जाएगी। बुधवार 15 अगस्त को हस्त नक्षत्र का होना सर्वार्थसिद्धि योग बनाएगा। कालसर्प दोष के निवारण की पूजा करने का यह दिन खास रहेगा।
नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त
इस बार 15 अगस्त के दिन नागपंचमी पर स्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष में इस योग को बहुत ही शुभ योग माना गया है। नागपंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 54 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
ऐसे दूर करें कालसर्प दोष
अगर किसी की कुंडली में कालसर्प दोष है तो नागपंचमी के दिन पूजा करने से कालसर्प दोष दूर हो जाता है। कालसर्प दोष को दूर करने के लिए यह दिन बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन नागों की पूजा और ऊं नम: शिवाय का जप करना फलदायी होता है। इसके अलावा इस दिन पर रुद्राभिषेक करने से भी जातक की कुंडली से कालसर्प दोष दूर हो जाता है।