अगले साल देश में आम चुनाव होने वाले हैं और राजनीतिक सरगर्मी की आहट सुनाई देने लगी है। बीजेपी के विजयी रथ को रोकने के लिए बंगाल की सीएम ममता बनर्जी लगातार एक संयुक्त मोर्चा बनाने में जुटी हुई हैं। आज इस लेख में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या कहती है ममता बनर्जी की कुंडली।
1 - ममता दीदी की मेष लग्न की कुंडली है। मंगल प्रधान जातक बेहद ऊर्जावान और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन रात एक करने वाले होते हैं। यही गुण ममता दीदी में साफ़ दिखाई देते हैं। उन्होंने तीन दशक से अधिक समय से राज्य पर काबिज वामपंथी शासन को उखाड़ दिया।
2 - लग्नेश मंगल लाभ भाव में विराजमान होकर उच्च के चंद्र पर दृष्टिपात कर रहा है जिससे उनका मन बेहद मजबूत है। ऐसा जातक किसी भी कार्य को जब हाथ में लेता है तो वो उसे पूरा करके ही छोड़ता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मंगल शनि की राशि में है और सप्तम भाव में शनि उच्च हैं और उस पर केतु की दृष्टि होने के कारण उन्हें परिवार और विवाह का सुख नहीं मिला। यहां शनि की पूरी ऊर्जा ममता दीदी के व्यक्तित्व में दिखाई देती है।
3 - मेष लग्न में परम राजयोग कारक गुरु चौथे भाव में अपनी उच्च राशि में विराजमान है वहीं उनका राशि स्वामी भी उच्च है। इसी कारण उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त होता है और वो चुनाव में विजय प्राप्त करती है। ऐसे जातक को उसके ही घर हराना असम्भव हो जाता है क्योंकि चौथे भाव की ऊर्जा किसी बाहरी व्यक्ति को सफल नहीं होने देती है।
4 - यहां साझेदारी का कारक सप्तम भाव ठीक नहीं है। सप्तम का स्वामी शुक्र अष्टम भाव में मंगल की राशि में है वही पापकर्तरी योग में भी विराजमान है। इसी कारण से उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और अकेले ही संगठन को मजबूत किया और राज्य की सीएम बनी। यहां अष्टम भाव का शुक्र ममता दीदी को सुख वैभव से दूर कर रहा है इसलिए उनके पास थोड़ी ही संपत्ति है और वो साधारण महिला की तरह रहती है। अष्टम के शुक्र को ज्योतिष में साधना की तरफ ले जाना वाला भी कहा गया है इसलिए ममता दीदी काली की भक्त भी है।
5 - इस कुंडली में सत्ता का कारक सूर्य भाग्य भाव में राहु के साथ ग्रहण योग में विराजमान है। यह इस बात का साफ़ संकेत है कि भाग्य से कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। यहां विराजमान सूर्य इनकी केंद्र सरकार से बनने नहीं देगा वहीं उच्च पद पर विराजमान लोगों से मतभेद के भी संकेत है। वाणी कारक बुध पर राहु केतु शनि का प्रभाव होने के कारण अपने ही बयानों से मुसीबत में फंस जाती है। शनि देव की दृष्टि शत्रु सूर्य पर होने के कारण इन्हे अपने राज्य के बाहर आशातीत सफलता नहीं मिल पाई है।
6 - वर्तमान में गुरु का गोचर द्वादश भाव में और शनि का गोचर दशम भाव में होने से इन्हे लाभ होता हुआ दिखाई दे रहा है। चूंकि इनकी कुंडली में गुरु बेहद बलवान है इसके कारण अब राज्य से बाहर निकलकर ये सक्रिय हो रही है। आने वाले चुनाव में ये पूरी सम्भावना है कि विपक्ष को लामबंद करने की पूरी रणनीति इन्ही के द्वारा बनाई जाएगी।
7 - जहां तक बात पीएम के पद की है वो इनकी कुंडली को देखकर थोड़ा मुश्किल दिखाई पड़ रहा है। उसके दो कारण है, पहला सत्ता कारक सूर्य का ग्रहण योग में विराजमान होकर शनि से दृष्ट होना और दूसरा सप्तम में विराजमान शनि पर केतु की दृष्टि होना ! ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सहयोगियों को बनाए रखने के लिए इन्हे काफी समझौते करने होंगे लेकिन उच्च का चंद्र ऐसा होने नहीं देगा।
8 - चौथे भाव में विराजमान उच्च का गुरु और दूसरे भाव में विराजमान उच्च का चंद्र इन्हे राज्य में विजयी करेगा लेकिन दिल्ली ममता बनर्जी के लिए फिलहाल दूर है।