कालपुरुष की कुंडली में चौथे भाव पर कर्क राशि का आधिपत्य होता है और इसे स्वामी चंद्रमा होते हैं। उत्तर कालामृत में कुंडली के चौथा भाव माता, पानी, वाहन, जाति, रिश्ते, दूध, गाय, भैंस आदि को दर्शाता है। इसके अलावा इस भाव से विश्वास, तालाब, हवेली, कला, घर पर मनोरंजन के साधनों के बारे में विचार किया जाता है। चतुर्थ भाव जमीन-जायदाद, अचल संपत्ति, वाहन सुख, शिक्षा को प्रभावित करता है। इस भाव से जातक के जन्म स्थान से दूर जाने की संभावना को भी बताता है।
कुंडली का चौथ भाव आपके पास वाले रिश्ते और संबंधों का बताता है। यानी यह भाव आपके सभी प्रकार के रिश्ते को दर्शाता है। इससे छोटे भाई-बहनों के सुख सुविधाओं और बच्चों के खोने के भय को बताता है।
कुंडली के चौथे भाव से विवाह के बाद आपकी पत्नी और बच्चों के बारे में विचार किया जाता है। यह आपके परिवार में संयुक्त संपत्ति में आपके भाग्य, साथ ही ससुराल पक्ष के लोगों भाग्य, कर्जों से मुक्ति का बोध करता है। चौथे भाव से आपके जीवनसाथी के करियर और प्रोफेशन का बोध कराता है। कुंडली चतुर्थ और दशम भाव में स्थित ग्रह एक-दूसरे के साथ अच्छे संबंध बनाते हैं।
चौथे भाव में ग्रह
1- कुंडली के चौथे भाव में सूर्य यदि कमजोर या पीड़ित है तो व्यक्ति के जीवन में असंतोष आता है। इस भाव में सूर्य का होना अच्छा नहीं माना जाता है। नीच का सूर्य होने पर जातक भूमिहीन, मकान सुख से वंचित और धनहीन होता है। लेकिन अगर सूर्य स्वराशि का हो तो यहां अच्छा माना जाता है।
2- कुंडली के चौथे भाव में चंद्रमा के विराजमान होने पर यह भाव अच्छा हो जाता है। अगर इस भाव में चंद्रमा उच्च का या फिर स्वराशि में हो और इस पर शुभ-उच्च ग्रहों की द्दष्टि पड़ रही हो तो जातक सभी प्रकार के सुखों का भोग करता है।
3-कुंडली के चौथे भाव में मंगल का होना अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसा जातक अपराधी स्वभाव का होता है।
4-जब किसी जातक की कुंडली में बुध चतुर्थ भाव में हो और इस पर शुभ ग्रहों की द्दष्टि पड़ रही हो तो ऐसे जातक को नौकर चाकर, सुख-सुविधा समेत अन्य तरह की खुशियां मिलती है।
5- कुंडली के चौथे भाव में अगर गुरु उच्च का हो और अन्य शुभ ग्रहों की द्दष्टि पड़ रही हो जातक उच्च पद की प्राप्ति करता है और राज्य से अच्छा धन की प्राप्ति में सफल होता है। लेकि अगर यही गुरु नीच का हो तो परिवार में भाईयों से संबंध अच्छा नहीं होता है।
6- चतुर्थ भाव में शुक्र का होना या फिर इस पर इसकी द्दष्टि पड़े तो जातक को हर एक तरह के भौतिक सुख-सुविधाओं का लाभ मिलता है। ऐसे जातकों के भाग्य का उदय कभी-कभी विवाह करने के बाद होता है।
7- चौथे भाव में शनि का होना अच्छा नहीं माना गया है। शनि धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं और यह कार्यों में धीमापन लाते हैं। अगर इस भाव में शनि नीच के होकर बैठे तो जातक के जीवन में दरिद्रता आती है। ऐसे में जातक एकांतप्रिय और बुढ़ापे में चिड़चिड़ा हो जाता है।
8- अगर कुंडली के चौथे भाव में राहु विराजमान है तो जातक को जमीन-जायदाद के मालिक होने की तीव्र इच्छा होती है, लेकिन अगर इस भाव में राहु पीड़ित हो जाए तो अच्छा नहीं माना जाता है।
9- कुंडली के चौथे भाव में केतु होने पर जातक अपने मूल स्थान को छोड़कर कहीं और जाकर बसता है।