कालसर्प दोष को ज्योतिषशास्त्र में साढ़े साती की तरह ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह राहु की दशा में आसमान की बुलंदियों को छूता है तो राहु की अशुभ दशा में दु:ख एवं कष्ट भोगता है।
कालसर्प दोष जिनकी जन्म कुंडली में होता है उन्हें राहु की महादशा कैसे प्रभावित करती हैं आइये इसे देखे ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक राहु की महादशा संघर्ष पूर्ण होती। है। इसकी महादशा जब चलती है तो जीवन में तेजी से उतार चढ़ाव आता है।
राहु की दशा का फल बहुत जल्दी मिलने लगता है,जिनकी जन्म कुंडली में कालसर्प योग होता हैं, उन्हें इस ग्रह की दशा में विशेष रूप से परेशानी और कष्ट उठाना होता है। गोचर में राहु की महादशा कालसर्प वालों के लिए विशेष पीड़ा दायक होती हैं। जब इसकी दशा आती हैं तो व्यक्ति को मुश्किल हालातों से दो-चार होना पड़ता है।
राहुदेव को सर्प का सिर और केतुदेव को सर्प की पूंछ माना गया है। जब कुण्डली में सभी ग्रह इनके बीच में आ जातें हैं तो कालसर्प योग ग्रहों को निगल लेता है। कालसर्प के पेट में जाने के बाद शुभ योग और शुभ ग्रह भी कमजोर हो जाते है और इसका प्रभाव राहु देव की महादशा के दौरान मिलता है।
जन्म कुंडली में कालसर्प योग है और राहु देव की महादशा चल रही है तो इस समय जीवन निराशा और घोर पीडादायक महसूस होगा। इस समय जीवन की गाड़ी आप सीधी राह ले जाना चाहेंगे परंतु हर चीज उल्टी होंगी। आपको अपनी मेहनत का अंश मात्र फल मिलेगा एवं हर ओर से आपको नुकसान महसूस होगा। लेकिन अगर आप इस समय धैर्य धारण करके राहु देव की उपासना करें तों आप विपरीत स्थिति में कुछ राहत महसूस करेंगे।
राहु की महादशा मे जहाँ भयंकर कष्ट होता हैं। वही जब इसकी दशा उतरती है तो तेजी से शुभ परिणाम मिलने लगता है। यह दशा में व्यक्ति को इतना परिश्रमी और संघर्षशील बना देती हैं कि व्यक्ति मुश्किल हालातों के साथ कामयाबी की राह पर चलना सीख जाता है और महान उपलब्धियां हासिल करता है।
राहु की महादशा में जो हार मान कर बैठ जाता है उसका जीवन राहुदेव कष्टमय बना देते हैं इसलिए अगर आपकी जन्म कुंडली में कालसर्प योग है और राहुदेव की महादशा अन्तर्दशा में मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ रहा है तो मन को स्थिर रखें और शुभ समय का इन्तजार कीजिए आपको शुभ परिणाम अवश्य मिलेगा।