Independence Day 2020 74th Independence Day Kundli Of India
इस वर्ष हम 74वां स्वाधीनता दिवस मना रहे हैं। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आज़ादी मिलने के बाद भारत विगत 73 वर्षों में कहां खड़ा है इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। आज़ादी के अंतिम हस्ताक्षर के समय महानिशीथ काल में बृषभ लग्न के क्षितिज पर उदय होने के समय हमें स्वाधीन होने का सुअवसर प्राप्त हुआ। तत्कालीन बृषभ लग्न की भारत की जन्मकुंडली में 'अनंत' नामक काल-सर्प योग बना हुआ है जिसके स्वामी स्वयं भगवान सूर्य हैं। कुंडली के लग्न में ही राहू, द्वितीय धन भाव में मारकेश मंगल, तीसरे पराक्रम भाव में चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र और शनि बैठे हैं। छठे शत्रुभाव में गुरु और सातवें भाव में केतु बैठे हैं। बाकी के घर खाली हैं।
मेदनी ज्योतिष में किसी भी राष्ट्र की जन्मकुंडली का लग्न ,द्वितीय, चतुर्थ छठा और नवम भाव अति महत्वपूर्ण होता है कारण यह कि लग्न से उस देश की प्रगति और शासन सत्ता की ईमानदारी आदि, द्वितीय भाव से धन और पडोसी राष्ट्रों से सम्बन्ध, चतुर्थ भाव से देश की जनता की मानसिक स्थिति और छठें भाव से ऋण, रोग और शत्रु के बारे में फलित किया जाता है।
भारत की कुंडली का 'अनंत' काल सर्प योग देश के लिए अभिशाप तो है किन्तु यही योग भारत के उत्थान में सर्वाधिक मदद भी करेगा क्योंकि किसी जातक की जन्मकुंडली में भी यदि यह कालसर्प योग हो तो वह जीवन में भारी उतार-चढ़ाव लाता है। ऐसा प्रत्यक्ष देखा भी गया क्योंकि इस योग के स्वामी सूर्य लग्न से पराक्रम भाव में बैठे हैं जिसे बहुत अच्छा कहा जाएगा। एक नकारात्मक प्रभाव यह भी रहेगा कि सूर्य कुंडली के चतुर्थ भाव के भी स्वामी हैं। यह भाव मित्रों और मानसिक शान्ति तथा कलह के विषय में जानकारी देता है। यही भाव भारत के नागरिकों एवं सुख-शान्ति के विषय में भी जानकारी देगा।
फलित ज्योतिष इस तरह के योगों के होने पर आपसी मतभेद कहकर सामने आता है और लोग एक दूसरे को नीचा दिखाने कोशिश में लगे रहते हैं अतः भारत को इन सब बिषमताओं से मुक्ति मिलना आसान नहीं रहेगा। द्वितीय भाव में मारकेश मंगल का बैठना पड़ोसियों के साथ-साथ हमेशा अपने ही लोंगों से खतरा पैदा कराएगा। आप ऐसा भी कह सकते हैं कि भारतवर्ष को बाहरी आतंकवादियों से कोई खतरा नहीं है, हमेशा खतरा उन गद्दारों से होगा जो माँ भारती ही छाती का अन्न खाते हैं और इन्हीं के आँचल में भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद जैसे संगीन अपराधों को जन्म देते हैं।
प्रसन्नता का विषय यह है कि शनि ने अकेले ही राज योग बनाया है जिसके फलस्वरूप देश तरक्की में पीछे नहीं रहेगा। यदि हम वर्तमान समय की बात करें तो 06 जुलाई 2011 राहू की महादशा आरम्भ हो चुकी है जो 06 जुलाई 2029 तक चलेगी। उसमें भी 18 जून 2019 से 06 जनवरी 2022 तक के मध्य बुध की अन्तर्दशा चली है। बुध भारत की जन्मकुंडली में द्वितीय धन भाव तथा पंचम विद्या भाव के स्वामी हैं तथा आजादी के दिन क्षितिज को स्पर्श करने वाले आश्लेषा नक्षत्र के भी स्वामी हैं जो अति शुभ फलदायी रहेंगे। इन भावों सम्बंधित फल देश की जनता को सर्वाधिक मिलेगा।
भारत का आर्थिक पक्ष और मजबूत होगा तथा विदेशी मुद्रा भण्डार में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी होगी। बुध के पंचम भाव का स्वामी होने के फलस्वरूप देश शिक्षा-विज्ञान एवं प्रौद्योगकी के क्षेत्र में अत्यधिक विकाश करेगा। युवा वर्ग अथवा वैज्ञानिक नए नए आविष्कार करके देश वासियों और पूरी दुनिया को चौंकाएंगे। ग्रह गोचर तथा योगों के सुप्रभाव के अनुसार शिक्षा-शोध एवं आविष्कार और विदेशी मुद्राभण्डार वृद्धि की दृष्टि से 74 वर्ष अति अनुकूल रहने वाला है।