वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों का विशेष महत्व होता है, जिसमें हर एक ग्रह का अपना खास महत्व होता है। ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर बहुत ही गहरा पड़ताा है। आज हम आपको सभी ग्रहों में सबसे बड़े और शुभ ग्रह माने जाने वाले ग्रह गुरु के बारे में बताने जा रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को देवता का गुरु माना गया है। देवगुरु बृहस्पति को गुरु, ज्ञान, शिक्षक, संतान, धन, दान, पुण्य आदि का कारक ग्रह माना जाता है। देवगुरु को धनु और मीन राशि का स्वामी माना जाता है। इसके अलावा यह पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के के स्वामी होते हैं। अगर किसी जातक की जन्मकुंडली में गुरु की स्थिति अच्छी नहीं तो तो व्यक्ति को नौकरी और विवाह में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस तरह अगर कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर है तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जब गुरु अशुभ होते आती है ऐसे परेशानियां
जिन जातकों की कुंडली में गुरु अगर अशुभ है तो उस व्यक्ति को शिक्षा के क्षेत्र में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक की शिक्षा अधूरी रह जाती है। कुंडली में गुरु की कमजोर या फिर पीड़ित है तो व्यक्ति की ग्रोथ रूक जाती है। इसके अलावा शारीरिक कष्ट जैसे पेट से जुड़ी कुछ समस्याएं और कैंसर जैसी बीमारियां का सामना करना पड़ता है। गुरु के अशुभ होने पर व्यक्ति के विवाह में देरी होती है। वहीं अगर विवाह हो गया तो दांपत्य जीवन में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
गुरु को मजबूत करने के उपाय
- जिन जातकों की कुंडली में गुरु कमजोर होते हैं उनको मजबूत करने के लिए गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए केले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ पर हल्दी, गुड़ और चने की दाल अर्पित करें। इससे गुरु की कमजोर स्थिति मजबूत होती है।
- गुरु की कृपा पाने के लिए और कुंडली में गुरु की अशुभ स्थिति को मजबूत करने के लिए देवगुरु को प्रसन्न करने के लिए बृहस्पति को व्रत रखें। इससे सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
- जिन जातकों के विवाह में देरी होती हैं उनको नहाने के पानी में हल्दी डालकर नहाना चाहिए। ऐसे करने से विवाह के योग बनते हैं।
- गुरुवार के दिन गाय को पीली दाल और गुड़ खिलाने से देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा मिलती है। इससे व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान और करियर में यश की प्राप्ति होती है।