Chaturmas Lord Vishnu Story: हिंदू धर्म में, भगवान विष्णु, ब्रह्मा (रचयिता) और भगवान शिव (विनाशक) के साथ त्रिमूर्ति के रूप में पूजा की जाती है। इन देवताओं से जुड़े कई आख्यानों में से, भगवान विष्णु की चार महीने की योगनिद्रा की कहानी बहुत चर्चित है, जिसने सदियों से भक्तों की जिज्ञासा को बनाए रखा है। मान्यताओं के अनुसार इन चार महीनों में, आषाढ़ शुक्ल पक्ष से कार्तिक शुक्ल पक्ष तक, भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं। इस अवधि को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है और विवाह, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। भगवान विष्णु की चार महीने की योगनिद्रा के रहस्य के पीछे एक प्रचलित कहानी है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
राजा बलि और बौने अवतार की कहानी
भगवान विष्णु की निद्रा से जुड़ी सबसे प्रचलित कहानियों में से एक राजा बलि की है, जो एक परोपकारी राजा था और उसके पास अपार शक्ति थी। राजा बलि को ये वरदान था कि जो भी उनके सामने युद्ध करने आएगा उसकी दुगनी शक्ति राजा बलि के पास आ जाएगी। देवताओं ने उसके बढ़ते प्रभाव से भयभीत होकर, भगवान विष्णु से ब्रह्मांड में संतुलन बनाने का आग्रह किया। भगवान विष्णु के सामने बड़ी चुनौती ये थी कि राजा बलि उनका बहुत बड़ा भक्त था, इसलिए उन्होंने एक षड्यंत्र रचा। भगवान विष्णु ने अपने असीम ज्ञान से, एक बौने का रूप धारण किया, और राजा बलि के पास गए और उनसे तीन डेग(पग) भूमि का दान मांगा। राजा बलि, अपनी अटूट उदारता के लिए जाने जाते थे, वे तुरंत सहमत हो गए। अब अपने पहले कदम से, बौने के रूम में भगवान विष्णु ने पूरी पृथ्वी लोक को ढक लिया, और दूसरे कदम में उन्होंने स्वर्ग को अपने अधीन कर लिया। अपने छोटे अतिथि की असली पहचान का एहसास करते हुए, राजा बलि ने अपना सिर तीसरे कदम के रूप में उन्हें अर्पित कर दिया।
माता लक्ष्मी को चलना पड़ ये चाल
इस प्रकार भगवान विष्णु ने बौने का अवतार लेकर बलि से तीनों लोकों को मुक्त करवाया और देवराज इंद्र समेत सभी देवताओं का भय दूर किया। अब भगवान विष्णु ने राजा बलि के भक्ति भाव से प्रभावित होकर उनसे वर मांगने को कहा, बाली ने भगवान विष्णु से अपने साथ पाताल चलकर हमेशा वहीं रहने का वर मांगा। अब भगवान विष्णु राजा बलि के साथ पाताल लोक में रहने लगे। ऐसा होने से देव लोक के सभी देवी-देवता चिंतित हो गए। अब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को छुड़ाने के लिए एक चाल चली। माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल लोक से निकालने के लिए एक साधारण स्त्री का रूप धारण किया और राजा बलि को राखी बांधी। राखी बांधने के बाद उन्होंने भगवान विष्णु को पाताल लोक मुक्त करने का वचन मांगा।
ये है चातुर्मास मनाने कारण
ऐसे में भगवान अपने भक्त को उदास नहीं करना चाहते थे। इसलिए भगवान विष्णु ने राजा बलि को वचन दिया कि वह आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तक वे पाताल लोक में निवास करेंगे। यही कारण है कि भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में रहते हैं। और तभी से हर साल भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में जाते हैं, जिस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।