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Budh Gochar 2026: बुध का मकर राशि में परिवर्तन, जानें मेष राशि वालों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव ?

Mon, 19 Jan 2026 04:43 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

  • बुध को ज्योतिष में राजकुमार का दर्जा प्राप्त है।
  • बुध मिथुन और कन्या राशि के स्वामी ग्रह हैं। 
  • बुध 17 जनवरी को शनि की राशि मकर में गोचर कर चुके हैं।
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बुध गोचर 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बुध को वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि, व्यापार, लेखन, वाणी और तर्कशास्त्र का कारक ग्रह माना जाता है। बुध 17 जनवरी को सुबह करीब 10 बजकर 10 मिनट पर धनु राशि से अपनी यात्रा को विराम देते हुए मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। मकर राशि के स्वामी ग्रह शनिदेव होते हैं, जिन्हें कर्म, न्याय और अनुशासन का कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में बुध ग्रह को तर्कशील और जल्दी निर्णय लेने वाला ग्रह माना जाता है। वहीं शनि धीरे प्रभाव वाले ग्रह हैं। आइए जानते हैं बुध के मकर राशि में गोचर करने से मेष राशि के जातकों पर किसी तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा। 
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मेष राशि पर बुध के गोचर का प्रभाव
  • मेष राशि के जातकों के लिए बुध आपके तीसरे और छठे भाव के स्वामी होते हैं।
  • बुध के मकर राशि में गोचर करने से यह आपके दशम भाव में हैं। ऐसे में करियर-कारोबार के लिए यह अच्छा होगा।
  • जो लोग विदेशों में नौकरी करते हैं उनके लिए वहां पर बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
  • कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना होगी। आपको अपनी क्षमता में वृद्धि होगी। 
  • जो लोग बिजनेस करने के इच्छुक हैं उनको अच्छा मुनाफा हासिल हो सकता है।
  • नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग हैं और आप अपने प्रतिद्वदिंयों का जमकर सामना करना होगा। 
  • धन बचत करने में आपको कामयाबी मिलेगी और कुछ कठिन आर्थिक फैसले आप ले सकते हैं। 
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ज्योतिष में बुध ग्रह
  • - वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सबसे छोटा और शुभ ग्रह माना जाता है। 
  • - सभी नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है। 
  • - बुधदेव को वाणी, व्यापार, गणित, तर्कशास्त्र, संचार, बुद्धि और त्वचा का कारक ग्रह माना जाता है। 
  • - ज्योतिष में बुध को द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है। यानी बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ होते हैं उसकी के अनुसार फल प्रदान करते हैं। 
  • - मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व बुध देव को प्राप्त है। 
  • - बुध शुभ ग्रहों के साथ होने पर शुभ फल और अशुभ ग्रहों के साथ होने पर अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह शुक्र,गुरु और बली चंद्रमा के साथ हों तो अच्छे फल प्रदान करते हैं। वहीं पापी ग्रहों के साथ होने पर जैसे राहु-केतु, शनि, सूर्य और मंगल तो अशुभ फल प्रदान करते हैं। 
  • - बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से यह बार-बार अस्त हो जाते हैं। 
  • - बुध ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती नक्षत्र के अधिपति ग्रह होते हैं। 
  • - कुंडली में बुध के मजबूत होने पर व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ और राजनीति में कुशल होता है। 
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ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं। बुध को मिथुन और कन्या राशियों का स्वामी का ग्रह माना जाता है।

कुंडली में बुध को मजबूत करने के उपाय
  • बुधवार को भगवान गणेश को 11 मोदक का भोग लगाएं।
  • बुधवार के व्रत रखें।
  • बुधवार के दिन हरि चूड़ियों का दान करें।
  • रोजाना आप बुध स्तोत्र का पाठ करें।
  • बुध ग्रह से जुड़े मंत्रों का 108 बार जाप करें।
  • यदि संभव हो, तो आप पन्ना रत्न भी धारण कर सकते हैं।
  • बुधवार के दिन हरे रंग के वस्त्र पहनें।
  • रोजाना तुलसी को जल चढ़ाएं।
  • बुधवार के दिन गाय को घास खिलाएं।
  • हरी मूंग की दाल का दान करें। 
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