बुद्धि, वाणी और संचार के कारक ग्रह बुध अब अपनी स्वराशि मिथुन की यात्रा को विराम देते हुए अपने शत्रु चंद्रमा की राशि में प्रवेश कर चुके हैं। बुधदेव को ज्योतिष में बहुत ही खास स्थान प्राप्त है। यह चंद्रमा के बाद दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो तेज गति से चलने वाले ग्रह हैं। चंद्रमा की राशि में बुध का गोचर अच्छा नहीं माना जाता है। बुध के कर्क राशि में गोचर करने से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह का प्रभाव पड़ता है। बुध के कर्क राशि में गोचर करने से सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं बुध के कर्क राशि में गोचर करने से वृषभ राशि वालों पर किस तरह का असर देखने को मिल सकता है।
बुध का गोचर और वृषभ राशि पर प्रभाव
वाणी और संचार के कारक ग्रह बुध आपकी कुंडली के दूसरे और पांचवे भाव के स्वामी होते हैं। अब कर्क राशि में बुध के गोचर करने से यह आपके तीसरे भाव में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार इस भाव में बुध ग्रह का गोचर आमतौर पर मिलाजुला रहता है। आपके लिए कुछ चिंताओं में वृद्धि होने की संकेत हैं। अपनों के साथ कुछ वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में आपको उतना लाभ नहीं मिलेगा जितना आपने सोच होगा। सावधानी के साथ कार्यो को पूरा करने का प्रयास करना होगा। इस दौरान आपके मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा।
ज्योतिष में बुध ग्रह
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सबसे छोटा और शुभ ग्रह माना जाता है।
- सभी नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है।
- बुधदेव को वाणी, व्यापार, गणित, तर्कशास्त्र, संचार, बुद्धि और त्वचा का कारक ग्रह माना जाता है।
- ज्योतिष में बुध को द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है। यानी बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ होते हैं उसकी के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
- मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व बुध देव को प्राप्त है।
- बुध शुभ ग्रहों के साथ होने पर शुभ फल और अशुभ ग्रहों के साथ होने पर अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह शुक्र,गुरु और बली चंद्रमा के साथ हों तो अच्छे फल प्रदान करते हैं। वहीं पापी ग्रहों के साथ होने पर जैसे राहु-केतु, शनि, सूर्य और मंगल तो अशुभ फल प्रदान करते हैं।
- बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से यह बार-बार अस्त हो जाते हैं।
- बुध ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती नक्षत्र के अधिपति ग्रह होते हैं।
- कुंडली में बुध के मजबूत होने पर व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ और राजनीति में कुशल होता है।
ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं।
कुंडली में बुध को मजबूत करने के उपाय
- बुधवार को भगवान गणेश को 11 मोदक का भोग लगाएं।
- बुधवार के व्रत रखें।
- बुधवार के दिन हरि चूड़ियों का दान करें।
- रोजाना आप बुध स्तोत्र का पाठ करें।
- बुध ग्रह से जुड़े मंत्रों का 108 बार जाप करें।
- यदि संभव हो, तो आप पन्ना रत्न भी धारण कर सकते हैं।
- बुधवार के दिन हरे रंग के वस्त्र पहनें।
- रोजाना तुलसी को जल चढ़ाएं।
- बुधवार के दिन गाय को घास खिलाएं।
- हरी मूंग की दाल का दान करें।