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Astrology: कौन से ग्रह बनाते हैं जातक को कुशल वक्ता? कुंडली में कुशल वक्ता होने के योग

Wed, 24 May 2023 10:17 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

वैदिक ज्योतिष में दूसरे भाव को वाणी भाव कहा गया है और गुरु इस भाव के कारक ग्रह है। बुध को भी संवाद का कारक माना गया है वही शुक्र व्यक्ति के व्यक्तित्व को मजबूत करने वाला ग्रह है।
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कुंडली में अच्छा वक्त के योग - फोटो : horoscope 2023
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विस्तार
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वैदिक ज्योतिष में दूसरे भाव को वाणी भाव कहा गया है और गुरु इस भाव के कारक ग्रह है। बुध को भी संवाद का कारक माना गया है वही शुक्र व्यक्ति के व्यक्तित्व को मजबूत करने वाला ग्रह है। इन सबके शुभ होने पर या भावों के स्वामी के शुभ प्रभाव में होने पर जातक कुशल वक्ता होता है। ज्योतिष में कुछ ऐसे योगों के बारे में जानकारी दी गई है। आइए सबसे पहले उन्हें जान लेते हैं। 
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1 - अगर वाणी भाव का स्वामी अपने ही भाव में गुरु के साथ विराजमान हो तो जातक बोलने में कुशल और अपनी बात को स्पष्ट रूप से कहने वाला होगा। इस भाव पर कोई पाप प्रभाव नहीं तो अच्छा भाषण देने वाला होगा। 
2 - गुरु और बुध अगर दोनों दूसरे भाव में विराजमान हो और कोई भी एक ग्रह उच्च का हो तो नीचभंग राजयोग बना रहा हो तो जातक बेहद मधुर बोलने वाला होगा और वाकपटु होगा। 
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3 - यदि नवम भाव और दशम भाव के स्वामी वाणी भाव में विराजमान हो और दशम भाव से गुरु अपनी पंचम दृष्टि से उसे देख ले तो भी जातक सत्य बोलने वाला और ओजस्वी वक्ता होगा। 
4 - यदि शुक्र के पंचम गुरु हो और गुरु से पंचम चन्द्रमा और चंद्र से पंचम सूर्य हो तो जातक अद्भुत किस्म का ज्ञानी और मन को मोहने वाला वक्ता होता है। 
5 - बुध शुक्र युति, चन्द्रमा बुध युति, चंद्रमा शुक्र युति ! इन 3 प्रकार की युतियों को विद्वानों ने एक मत से स्वीकार किया है। ऐसा व्यक्ति हाजिर जवाब होता है। 
6 - मंगल में तेज है और बुध संवाद है। विद्वानों के अनुसार उच्च के मंगल के साथ बुध या उच्च के बुध के साथ मंगल हो और किसी पाप ग्रह की दृष्टि नहीं हो तो जातक अपनी वाणी से बड़े आंदोलन खड़े कर सकता है। 

अब इन योगों को समझने के लिए उदाहरण स्वरूप स्वर्गीय अटल बिहारी जी की कुंडली समझते हैं कि कैसे वो इतने ओजस्वी वक्त हुए। 

1 - दशम और लाभ के स्वामी वाणी भाव में उसी भाव के स्वामी के साथ विराजमान है। 
2 - इनकी कुंडली में बुध गुरु दोनों वाणी भाव में वहीं शुक्र चन्द्रमा लग्न में विराजमान है। 
3 - सूर्य से दूसरे भाव का स्वामी शनि अपनी उच्च राशि में विराजमान है। 
4 - इस कुंडली में चन्द्रमा दुर्धरा योग बना रहा है वहीं मंगल के साथ नीच भंग राजयोग में है। 
5 - यहां अष्टम भाव के स्वामी का वाणी भाव के स्वामी होना इस बात का संकेत है कि जातक एक अच्छा और कुशल वक्ता होगा। 
6 - यहां लग्नेश मंगल पंचम भाव में विराजमान होकर बुद्धि को तीक्ष्ण कर रहा है वहीं पंचम भाव का स्वामी वाणी भाव में बलवान होकर इस बात के प्रबल संकेत कर रहा है कि जातक उच्च कोटि का वक्ता होगा।
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