फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन अशुभ ग्रहों के प्रकोप से इस साल दुर्घटना, अग्निकांड और युद्ध के हालात, पढे़ं ज्योतिषी विश्लेषण

Sun, 15 Jun 2025 04:12 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के अनुसार साल 2025 काफी उथल-पुथल और दुर्घटनाओं से भरा रहने वाला होगा। साल 2025 में ग्रहों-नक्षत्रों की चाल से कई तरह की प्राकृतिक आपदा, राजनीतिक उठापटक, युद्ध, भूकंप और आगजानी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा ग्रहों की अलग-अलग युति से कई तरह अशुभ योगों का भी निर्माण हुआ है। 
 
विज्ञापन
खतरनाक और अशुभ ग्रहों का योग - फोटो : adobe
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

12 जून 2025 का दिन देश के लिए झकझोर देने वाली घटना के रूप में याद किया जाएगा। इस दिन दोपहर करीब 01 बजकर 40 मिनट पर एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या A।171 लंदन जाने के लिए अहमदाबाद एयरपोर्ट से टेक ऑफ के फौरन बाद ही दुर्घटनाग्रस्त गई और जिसमें सवार  यात्रियों की मौत हो गई थी। इसके अलावा जहां यह विमान गिरा वहां पर भी कई लोगों की मृत्यु हुई। इस वीभत्स विमान दुर्घटना के दूसरे दिन बाद ही इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले करके वहां के परमाणु ठिकानों को ध्वस्त करते हुए सेना के कई अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया, जिसके बदले में ईरान ने भी जवाबी कार्यवाई करते हुए इजरायल को ताबड़तोड़ हमले किए। और अब भी दोनों के देशों की बीच लगातार टकराव जारी है। इसी बीच आज, यानी 15 जून को उत्तराखंड के केदारनाथ के गौरीकुंड में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में 7 लोगों की जान चली गई। 
विज्ञापन


ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के अनुसार साल 2025 काफी उथल-पुथल और दुर्घटनाओं से भरा रहने वाला होगा। साल 2025 में ग्रहों-नक्षत्रों की चाल से कई तरह की प्राकृतिक आपदा, राजनीतिक उठापटक, युद्ध, भूकंप और आगजानी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा ग्रहों की अलग-अलग युति से कई तरह अशुभ योगों का भी निर्माण हुआ है। 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह समय-समय पर गोचर करते हुए शुभ योगों के अलावा कई तरह के अशुभ योगों का निर्माण भी करते हैं जिससे कारण देश-दुनिया में बड़ी आपदाएं, युद्ध और दुर्घटनाओं के घटित होने का संयोग बनता है। आपको बता दें कि  अभी साल 2025 का करीब 6 माह ही बीता है, जिसमें दो देशों के बीच युद्ध, आपदाएं, राजनीतिक उथल-पुथल और दुर्घटनाएं देखने को मिली है। वहीं ग्रह-नक्षत्रों के गोचर से आने वाला समय भी अच्छा नहीं दिखाई दे रहा है। ज्योतिष शास्त्र के कई जानकारों और विद्वानों का मानना है कि अभी गोचर में कई खतरनाक योग बन रहा है। आइए जानते हैं मौजूदा समय में किन-किन ग्रहों के योग से कौन सा अशुभ योग बना हुआ है। 

Brahma Aditya Yog: सूर्य, बुध और गुरु बनाने जा रहे हैं शुभ योग, इन 3 राशियों को मिलेगा धनलाभ

इन ग्रहों का खतरनाक योग
विज्ञापन

ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के मुताबिक अभी मंगल और शनि की बीच षडाष्टक योग, मंगल और केतु के योग से कुजकेतु योग, वहीं मंगल और राहु के बीच में समसप्तक योग बना हुआ है। ज्योतिष में इन योगों को बहुत ही अशुभ योग माना जाता है। दरअसल मंगल ग्रह को युद्ध, क्रोध, आवेग, रक्त, जमीन, दुर्घटना, साहत, वीरता और लड़ाई-झगड़े का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ शनि को भी पापी ग्रहों में गिना जाता है। यह आयु, रोग, न्याय और कर्म के कारक ग्रह माने जाते हैं। इसके अलावा राहु को छाया और अशुभ ग्रह माना जाता है जिसके चलते कई ग्रहों के साथ युति होने पर इसे शुभ ग्रह नहीं माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ इस साल तीन प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन भी देखने को मिला। ये तीन प्रमखु ग्रह हैं देवगुरु बृहस्पति, न्यायाधिपति व कर्मफलदाता शनि और राहु। इस साल गुरु मिथुन राशि में गोचर होते हुए अतिचारी हो गए हैं यानी गुरु मिथुन राशि में रहते हुए तेज गति से चल रहे हैं। ज्योतिष में गुरु का अतिचारी होना शुभ नहीं माना गया है। वहीं दूसरी तरफ शनि अपनी स्वराशि कुंभ से निकलकर जल तत्व की राशि मीन में और राहु मीन से कुंभ राशि में वक्री चाल चल रहे है। इन योगों के चलते ही देश-दुनिया में हादसे, युद्ध और मंदी के हालात बने हुए है। 

गुरु के अतिचारी होने से इस साल युद्ध, राजनीतिक उथल-पुथल और आपदाओं का संकट, ज्योतिषी ने की भविष्यवाणी

इतने दिनों तक रहेगा खतरनाक और अशुभ ग्रहों का योग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 7 जून को मंगल का सिंह राशि में गोचर अच्छा नहीं माना गया है। मंगल-शनि की बीच गोचर से षडाष्टक योग बना हुआ है और योग 28 जून 2025 तक रहेगा जिससे तरह की आपदाएं आ सकती हैं। मंगल के कन्या राशि में प्रवेश करते ही यह योग खत्म हो जाएगा। अब बात कर लेते हैं मंगल-केतु के संयोग से बने अशुभ कुजकेतु योग जो 28 जुलाई को समाप्त होगा। इस तरह से कुछ आने वाले कुछ दिन हवाई यात्रा, रेल, सड़क दुर्घटना की आशंका रहेगी। इसके अलावा दुनिया में भूकंप या सुनामी की खबरें भी सुनने को मिल सकती है। आइए अब जान लेते हैं हाल में हुई कई दुर्घटनाओं में बने ज्योतिष कनेक्शन के बारे में।  

12 जून 2025- अहमदाबाद विमान हादसा
वैसे देखा जाय तो देश-दुनिया में समय-समय पर कई विमान दुर्घटनाएं देखने को मिली है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में हवाई, सड़क और रेल दुर्घटनाओं के पीछे शनि, मंगल और राहु-केतु जैसे क्रूर और पापी ग्रहों को जिम्मेदार माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के ग्रंथों में विमान दुर्घटनाओं के लिए वायु तत्व के ग्रह और वायु तत्व की राशियां और इनसे बने अशुब योग के शामिल होने से होती है। इस समय शनि-मंगल की वजह से षडाष्टक योग, मंगल-केतु के कुजकेतु योग और राहु-मंगल के समसप्तक योग के चलते ही विमान हादसा हुआ और इसमें कई लोगों की मौतें हुईं। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार अगर मौजूदा समय का सूक्ष्म अध्ययन किया जाय तो इस दुर्घटना के पीछे वायु तत्व की राशियां और ग्रहों के संयोग के कारण यह बड़ी घटना घटित हुई। आपको बता दें कि ज्योतिष में सभी राशियों और ग्रहों को उनकी प्रकृति के आधार पर अग्नि, पृथ्वी, जल और वायु तत्व में विभाजित किया गया है। ज्योतिष में मिथुन, तुला और कुंभ राशि को वायु तत्व की राशि माना गया है वहीं दूसरी तरफ शनि और राहु को वायु तत्व का ग्रह माना गया है। अग्नि तत्व की राशियों की बात करें तो मेष, सिंह और धनु राशि इसमें शामिल होती है और सूर्य, मंगल और केतु को अग्नि तत्व का ग्रह माना गया है। इस तरह से जब भी ऐसे परिस्थिति बनती है जिसमें अग्नि तत्व के ग्रह और राशियों, वायु तत्व के ग्रह और राशियों के बीच असंतुलन पैदा होता है। फिर एक-दूसरे को पीड़ित करती हैं, तो उस समय इस तरह की विमान दुर्घटनाएं होने का संभावना सबसे ज्यादा होती है। 

इजराइल और ईरान के बीच युद्ध का छिड़ना
पिछले कई सालों से इजराइल और ईरान के बीच में तनाव चरम पर और अब इजराइल ने ईरान के ऊपर मिसाइलों से हमला करने से दोनों देशों की बीच युद्ध छिड़ गया है। दोनों देश लगातार एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं जिसमें भारी नुकसान और कई लोगों की जाने चली गई हैं। ज्योतिष शास्त्र के नजरिए अगर देखा जाय तो अशुभ ग्रहों के प्रभाव के चलते इस युद्ध की शुरुआत हो गई है। मंगल-केतु के योग से और शनि-मंगल के षडाष्टक योग के कारण युद्ध के हालात बने हुए हैं। आपको बता दें मंगल युद्ध और जमीन के कारक ग्रह होते हैं और कुछ विशेष परिस्थिति में इस तरह युद्ध और उन्माद पैदा होता है।
विज्ञापन



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें