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Shani Dev: शनिदेव इन लोगों को देते हैं सबसे ज्यादा कष्ट, करियर और सेहत पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव

Sun, 28 Apr 2024 02:12 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

शनि तुला राशि में उच्च के होते हैं जब मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि को तीन दृष्टियां प्राप्त है। तीसरी, सातवीं और दसवीं  दृष्टि। शनि के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में साढ़ेसाती और ढैय्या का सामना करना पड़ता है। शनि को न्यायाधीश, कर्मफलदाता और क्रूर ग्रह माना जाता है।
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कुंडली में शनि का अशुभ प्रभाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Shani Dev: वैदिक ज्योतिष में शनि और गुरु ग्रह का विशेष स्थान होता है। दोनों ही ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा पड़ता है। शनि ग्रह सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह माने जाते हैं। कालपुरुष की कुंडली में शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होते हैं। दसवां भाव यानी कर्म का भाव और ग्यारहवां भाव आय का भाव होता है। वहीं शनि कुंडली के 6, 8 और 11 भाव के स्वामी ग्रह होते हैं। शनि को दो राशियों का स्वामित्व प्राप्त है। कुंभ और मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं। शनि तुला राशि में उच्च के होते हैं जब मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि को तीन दृष्टियां प्राप्त है। तीसरी, सातवीं और दसवीं  दृष्टि। शनि के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में साढ़ेसाती और ढैय्या का सामना करना पड़ता है। शनि को न्यायाधीश, कर्मफलदाता और क्रूर ग्रह माना जाता है। यह व्यक्ति को उनके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। जातकों की कुंडली में शनि किस स्थान पर बैठे हैं यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। 

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के सभी 12 घरों का विशेष महत्व होता है और ये 12 घर जीवन के किसी न किसी स्थिति को दर्शाते हैं। कुंडली के दूसरे घर को लाभ स्थान, नवें घर को भाग्य का स्थान और दसवें भाव को कर्म यानी करियर का स्थान माना जाता है। आज हम आपको यह बताएंगे कुंडली में शनि की स्थिति शुभ भाव में न होने पर शनि किन जातकों के ऊपर अपना कहर बरपाते हैं। 

इन लोगों पर रहता है शनि का प्रकोप
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली में शनि छठे, आठवें और बाहरवें भाव में बैठे हैं। शनि का बुरा प्रभाव जातकों के जीवन पर पड़ेगा। 
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- अगर किसी जातक की कुंडली में शनि अपनी नीच राशि में बैठे हैं तो बुरा रिजल्ट प्रदान करेंगे। 
- वहीं अगर शनिदेव छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी ग्रहों के साथ विराजमान हैं तो बुरा प्रभाव देंगे। 
- इसके अलावा अगर जातक की कुंडली में शनि राहु, केतु सूर्य और चंद्रमा के साथ बैठे हैं तो जातक का जीवन कष्टकारी रहने वाला होगा। 
- अगर शनि और मंगल दोनों ही ग्रह एक साथ किसी भाव में बैठें है तो व्यक्ति के जीवन में अस्थिरता रहेगी। 

कुंडली में शनि के खराब होने का प्रभाव 
- वैदिक ज्योतिष में शनि को पापी और दुख का कारक ग्रह माना जाता है। कुंडली में शनि के बुरे प्रभाव के कारण व्यक्ति को धन और सेहत संबंधित कष्ट मिलते हैं। व्यक्ति को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। 
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- कुंडली में शनि दोष होने पर व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ता है। 
- कुंडली में शनि की स्थिति अच्छी न होने पर व्यक्ति के पैतृक संपत्ति में बाधाएं आती हैं।

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