वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के सभी 12 घरों का विशेष महत्व होता है और ये 12 घर जीवन के किसी न किसी स्थिति को दर्शाते हैं। कुंडली के दूसरे घर को लाभ स्थान, नवें घर को भाग्य का स्थान और दसवें भाव को कर्म यानी करियर का स्थान माना जाता है। आज हम आपको यह बताएंगे कुंडली में शनि की स्थिति शुभ भाव में न होने पर शनि किन जातकों के ऊपर अपना कहर बरपाते हैं।
इन लोगों पर रहता है शनि का प्रकोप
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली में शनि छठे, आठवें और बाहरवें भाव में बैठे हैं। शनि का बुरा प्रभाव जातकों के जीवन पर पड़ेगा।
- अगर किसी जातक की कुंडली में शनि अपनी नीच राशि में बैठे हैं तो बुरा रिजल्ट प्रदान करेंगे।
- वहीं अगर शनिदेव छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी ग्रहों के साथ विराजमान हैं तो बुरा प्रभाव देंगे।
- इसके अलावा अगर जातक की कुंडली में शनि राहु, केतु सूर्य और चंद्रमा के साथ बैठे हैं तो जातक का जीवन कष्टकारी रहने वाला होगा।
- अगर शनि और मंगल दोनों ही ग्रह एक साथ किसी भाव में बैठें है तो व्यक्ति के जीवन में अस्थिरता रहेगी।
कुंडली में शनि के खराब होने का प्रभाव
- वैदिक ज्योतिष में शनि को पापी और दुख का कारक ग्रह माना जाता है। कुंडली में शनि के बुरे प्रभाव के कारण व्यक्ति को धन और सेहत संबंधित कष्ट मिलते हैं। व्यक्ति को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।
- कुंडली में शनि दोष होने पर व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ता है।
- कुंडली में शनि की स्थिति अच्छी न होने पर व्यक्ति के पैतृक संपत्ति में बाधाएं आती हैं।