चौघड़िया हिंदू पंचांग का एक विशेष अंग माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए कोई शुभ मुहूर्त न मिले तो उस अवस्था में चौघड़िया का विधान है। इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य को प्रारंभ करने के लिए चौघड़िया का उपयोग किया जाशुभ - उत्तमता है। ज्योतिष शास्त्र में चार प्रकार की शुभ चौघड़िया होती हैं और तीन प्रकार की अशुभ चौघड़िया हैं। प्रत्येक चौघड़िया किसी न किसी कार्य के लिए निर्धारित है।
चौघड़िया क्या है?
हिंदू कैलेंडर पर आधारित शुभ और अशुभ समय का पता लगाने की प्रणाली चौघड़िया कहलाती है। चौघड़िया ज्योतिषीय गणना के आधार पर तैयार किया जाता है। चौघड़िया नक्षत्र और वैदिक ज्योतिष के आधार पर किसी भी दिन के पूरे 24 घंटों की स्थिति की जानकारी देती है। चौघड़िया में 24 घंटों को 16 भागों में विभाजित किया गया है। जिसमें आठ मुहूर्त का संबंध दिन से होता है और आठ मुहूर्त का संबंध रात से। चौघड़िया का हर मुहूर्त डेढ़ घण्टे का होता है। दिन और रात मिलाकर हर हफ्ते में 112 मुहूर्त होते हैं। दिन और रात के समय पूजा-पाठ आदि करने के लिए मुहूर्त का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चौघड़िया के प्रकार
चौघड़िया (मुहूर्त) के 7 प्रकार होते हैं, उद्बेग, चाल, लाभ, अमृत, काल, शुभ और रोग। हिंदू पंचांग के अनुसार 8 चौघड़िया(मुहूर्त) रात के दौरान और 8 चौघड़िया दिन के समय होते हैं। आईये जानते हैं चौघड़िया के प्रकार के बारे में -
दिन का चौघड़िया- यह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का समय होता है। अमृत, शुभ, लाभ और चाल को शुभ चौघड़िया माना जाता है। अमृत को सर्वश्रेष्ठ चौघड़िया में से एक माना जाता है। दूसरी ओर, उद्वेग, रोग और काल को अशुभ मुहूर्त माना जाता है। किसी भी अच्छे कार्य को करते समय अशुभ चौघड़िया से बचना चाहिए।
रात का चौघड़िया- यह सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच का समय होता है। रात में कुल 8 चौघड़िया होते हैं। रात और दिन दोनों के चौघड़िया एक समान परिणाम देते हैं।