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पितृ प्राणायाम: पितृ दोष का सटीक उपाय, जानें विधि और महत्व

Wed, 03 Feb 2021 07:32 PM IST
रुस्तम राणा कृष्णा गुरुजी (कृष्णकांत मिश्रा), नई दिल्ली

सार

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ दोष कुंडली में उस स्थिति में बनता है जब किसी जातक की पत्रिका में नौवें घर में सूर्य ग्रह हो और उसके साथ राहु, केतु, शनि भी साथ में हों। 9वें घर के अलावा किसी और घर में भी सूर्य ग्रह के साथ उपरोक्त ग्रहों को युति हो तो भी ग्रहण या अर्ध पितृ दोष माना जाता है।
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पितृ प्राणायाम: पितृदोष को दूर करने का सटीक उपाय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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यदि किसी जातक का कोई कार्य रुक रहा हो, बार-बार काम आखिरी में आकर रुक जाता हो, मांगलिक कार्यों में व्यवधान आता हो तो संभव है कि वह जातक पितृ दोष से पीड़ित हो। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ दोष कुंडली में उस स्थिति में बनता है जब किसी जातक की पत्रिका में नौवें घर में सूर्य ग्रह हो और उसके साथ राहु, केतु, शनि भी साथ में हों। 9वें घर के अलावा किसी और घर में भी सूर्य ग्रह के साथ उपरोक्त ग्रहों को युति हो तो भी ग्रहण या अर्ध पितृ दोष माना जाता है।

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पितृ दोष चंद्र कुंडली व लग्न कुंडली दोनों से देखा जाता है। हम कुंडली में पितृ दोष को दूर करने के लिए कई प्रकार के उपाय करते हैं। लेकिन मेरे व्यक्तिगत मत के अनुसार पितृ दोष का नाम ही उपयुक्त नहीं है। पितृ यानि हमारे पूर्वज, जो लाख कितनी विषमता सह कर गए हों, लेकिन वे हमें दुखी नहीं देख सकते हैं। पितृ दोष को दूर करने के लिए मैं आज आपको एक उपाय बताता हूं। जो आपके पंचतत्व शरीर को श्वास से जोड़कर पितरों की कृतज्ञता को लक्षित करेगा। यह उपाय पितृ प्राणायाम है। 

पितृ प्राणायाम क्या है?
एक शरीर श्वास की लय बद्ध विधि है जिसमें बाईं नासिका को चंद्र नाड़ी के नाम से जाना जाता है। जो शीतल होती है और चंद्रमा तत्व का कारक है। दाहिनी नासिका मे सूर्य नाड़ी का वास है जो स्वभाव से गर्म और ज्योतिष मे सूर्य पिता का कारक होता है।
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पितृ प्राणायाम विधि
1) एक स्थान पर सुखासन में बैठ जाएं
2) सीधे हाथ के अगूंठे से अपनी दाईं नासिका बंद करें
3) अगूंठे के पास की तर्जनी इंडेक्स फिंगर को अपने आज्ञा चक्र पर रखें (दोनों आई ब्रो के बीच का स्थान)
4) बाईं नासिका से अपनी माताजी का नाम चेहरा याद करते हुए श्वास भरें (माता जी जीवित हो या ना हो) लंबी गहरी श्वास बायी नासिका से)
5) अब अपनी बाईं नासिका को सूर्य की उंगली अनामिका से अपनी बायीं नासिका को बंद करें। दाईं नासिका से श्वास निकालें। अपने पिता जी का नाम चेहरा याद करें (पिता जी जीवित हो या ना हो)
6) कुछ पल विश्राम करें और पुनः दाई नासिका से श्वास भरें। अपने दादा जी का नाम व चेहरा याद करें (अगर याद हो) 
7) पुन: अपनी दाईं नासिका को अपने सीधे हाथ के अगूंठे से बंद कर बाईं नासिका से श्वास खाली करें। अपनी दादी का नाम व चेहरा याद कर के श्वास खाली करने के बाद कुछ पल विश्राम करें। 
पहले चक्र जो पूर्ण हुआ उसमें कुल चार श्वास का आना-जाना नासिका से हुआ।
8)दूसरा चक्र भी अपने नाना-नानी, पर नाना, पर नानी को याद करें (भले ही नाम चेहरा याद ना हो
9) इसी क्रम में तीसरा चक्र अपनी सासू, ससुर, पर ससुर, पर सासू को याद करें।

इस प्रकार 3 चक्र में 12 बार श्वास की प्रक्रिया होगी 12 रिश्तों के साथ उसके बाद विश्राम करें। ध्यान में जो भी समय पितरों के साथ गुजारा है। उसको याद कर जाने अनजाने में अगर आपकी तरफ से उनकी देखरेख में लापरवाही हुई हो तो पितरों से क्षमा मांगें। आपके बारह घर में बारह राशि विराजित होती हैं। जो अपने मालिक यानि ग्रह के आदेशानुसार आपके जीवन को प्रभावित करती हैं। इस पितृ प्राणायाम से हम अपने दस कमरे दोष मुक्त करते हैं। ज्योतिष शास्त्र कहता है आपकी पत्रिका के हर घर में आपका एक या एक से अधिक रिश्ता रहता है। इस पितृ प्राणायाम से हम अपने 10 कमरे में विराजित रिश्तों के प्रभाव या कुप्रभाव को संतुलित करते हैं।

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