मोती समुद्र में सीपियों के जरिए प्राप्त होती है। मोती सफेद,चमकदार और गोल आकार की होती है। रत्नों में मोती का विशेष महत्व होता है। चंद्रमा की तरह मोती के अंदर भी शीतला, शांत और सुंदर होती है। मोती का प्रभाव सीधे रूप से व्यक्ति के मन और शरीर में मौजूद रसायनों पर पड़ता है। साउथ सी मोती रत्न सबसे अच्छा माना जाता है।
कौन-कौन लोग मोती को धारण कर सकते हैं।
रत्न ज्योतिष शास्त्र में मोती के बारे में विस्तार से बताया गया है। ज्योतिष के अनुसार जिन जातकों की कुंडली मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न की होती है उन्हें मोती अवश्य ही धारण करना चाहिए। अगर किसी जातक के ऊपर चंद्रमा की महादशा चल रही है तो मोती पहनना बहुत ही शुभ लाभदायक होती है। इसके अलावा अगर किसी जातक की कुंडली में चंद्रमा 6,8 और 11वें भाव में स्थित है तो मोती पहनना शुभ होता है। कमजोर चंद्रमा को बली बनाने के लिए भी मोती पहनना चाहिए। लेकिन अगर किसी की कुंडली में चंद्रमा नीच भाव में मौजूद है तो मोती नहीं धारण करना चाहिए।
मोती धारण करने के लाभ:
- मोती रत्न चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है। मन को स्थिर,शांत और नकारात्मकता को खत्म करने के लिए मोती जरूर पहनना चाहिए।
- मोती धारण करने से आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- मोती पहनने से जातक के ऊपर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। क्योंकि मोती मां लक्ष्मी का बहुत ही प्रिय आभूषण है। मोती धारण करने पर व्यक्ति के जीवन में धन की कमी नहीं रहती।
- जिन लोगों को जल्दी गुस्सा आता है धैर्य की कमी होती है वे लोग मोती धारण कर अपने गुस्से को शांत कर सकते हैं।
- मोती पहनने से बल्ड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।
इस विधि से करें मोती धारण:
- मोती चंद्रमा का रत्न माना गया है। ऐसे में इस रत्न का ज्यादा से ज्यादा लाभ पाने के लिए चांदी की अंगूठी में डालकर कनिष्का अंगुली में पहनना चाहिए।
- मोती को शुल्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें। इसके अलावा जब पूर्णिमा तिथि हो तब भी मोती को धारण किया जा सकता है।
- मोती को धारण करने से पहले इसे कच्चा दूध और गंगाजल में डालकर शुद्ध करना चाहिए।
- मोती को पुखराज और मूंगा भी धारण कर सकते हैं।