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बुध का मीन राशि में प्रवेश: जानिए कुंडली के किस भाव मेंं बुध प्रदान करते हैं शुभ फल

Wed, 31 Mar 2021 10:12 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली

सार

  • बुध 31 मार्च की मध्यरात्रि मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ये इनकी नीचसंज्ञक राशि है। नीचराशि में प्रवेश के साथ ही इनके गुण दोषों में वृद्धि हो जाती है इसलिए इनसे संबंधित उपाय आवश्यकता अनुसार कर लेना चाहिए।
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mercury transit - फोटो : अमर उजाला
बुध 31 मार्च की मध्यरात्रि मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ये इनकी नीचसंज्ञक राशि है। नीचराशि में प्रवेश के साथ ही इनके गुण दोषों में वृद्धि हो जाती है इसलिए इनसे संबंधित उपाय आवश्यकता अनुसार कर लेना चाहिए। ये जातक को बैंकिंग के क्षेत्र, बीमा, आईटी, लेखन, शल्यचिकित्सा, न्याय के क्षेत्र, शिक्षण, प्रकाशन, राजनीति, आर्थिक सलाहकार तथा इंश्योरेंस के सेक्टर में अच्छी सफलता दिलाते हैं। ये सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह हैं। जब भी इनकी सूर्य के साथ युति होती है तो बुधादित्य योग का निर्माण होता है। जन्मकुंडली में जब ये अपने घर में केंद्र अथवा त्रिकोण में होते हैं तो भद्रयोग का निर्माण करते हैं जिसके फलस्वरूप जातक कार्यक्षेत्र में अत्यधिक सफलता और समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा पाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जन्मकुंडली के अलग-अलग भाव में बुध का फल-
प्रथम भाव-

जिनकी जन्मकुंडली में बुध प्रथम भाव में हों तो ऐसा जातक बुद्धिमान, सौम्य स्वभाव वाला, वाणी कुशल, शारीरिक सौंदर्य से परिपूर्ण, मिलनसार और समाज में लोकप्रिय होता है। उसकी तर्कशक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान के लोग कायल रहते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
द्वितीय भाव
जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में विराजमान बुध जातक को आर्थिक रूप से सफल बनाते हैं। आकस्मिक धन प्राप्ति का योग बनता है। अपनी वाणी कुशलता और कुशल नेतृत्व के बल पर ऐसा व्यक्ति सामाजिक पद प्रतिष्ठा हासिल करता है।

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बुध ग्रह
तृतीय भाव-
इस भाव में बुध के विराजमान रहने से जातक को भाई बहनों का विशेष स्नेह मिलता है। ऐसे लोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वे दूसरों के लिए हमेशा समर्पित रहते हैं। अपने लिए ज्यादा कुछ नहीं करते।
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कुंंडली
चतुर्थ भाव
इस भाव में बुध के विराजमान रहने से जातक स्वयं के बल पर संपत्ति अर्जित करता है। अपने ही धन के द्वारा मकान-वाहन का सुख भोगता है। उसे किसी कारणवश पारिवारिक कलह और मानसिक अशांति का सामना भी करना पड़ता है।
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कुंडली
पंचम भाव
इस भाव में बुध के विराजमान रहने से जातक प्रखर बुद्धि का स्वामी होता है। ऐसे लोग निति और शिक्षा के क्षेत्र में कई मील स्तंभ स्थापित करते हैं। इनकी संताने भी बुद्धिमान, विद्या में कुशल और कार्य-व्यापार में पूर्णरूप से सफल रहती हैं।
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कुंडली
छठा भाव
इस भाव में बुध के विराजमान रहने से जातक के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है उसके गुप्त शत्रुओं की अधिकता रहती है और उसे कोर्ट कचहरी के मामलों में भी जूझना पड़ता है। अपने ही लोग नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं।

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कुंडली
सप्तम भाव
इस भाव में बुध अत्यंत शुभफल देते हैं। दांपत्य जीवन भी सुखद रहता है और अपने घर में बुध विराजमान हो तो ससुराल पक्ष से भी सहयोग मिलता है। जातक लंबी आयु वाला, जनप्रिय, प्रसिद्ध, कुशल व्यवसायी, वक्ता, लेखक और चिंतक होता है।

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कुंडली
अष्टम भाव
इस भाव में बुध का फल काफी मिलाजुला रहता है। व्यक्ति को पूर्णरूप से भौतिक सुख की प्राप्ति होती है। सामाजिक पद प्रतिष्ठा बनी रहती है किंतु स्वास्थ्य संबंधी चिंता रहती है। चर्म रोग, पेट तथा हड्डियों के रोग का भय बना रहता है।

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कुंडली
नवम भाव
इस भाव में बुध के विराजमान होने से जातक देश-विदेश से सम्बंधित व्यापार करने वाला धर्मशास्त्रों का ज्ञाता, गणितज्ञ और प्रशासनिक कार्यों में ख्याति प्राप्त करता है। अपने साहस और पराक्रम के बल पर ऐसे लोग कामयाबियों के चरम तक पहुंचते हैं।

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कुंडली
दशम भाव
इस भाव में बुध विराजमान हों तो व्यक्ति बहुमुखी प्रतिभा का धनी होता है। वह मिलनसार न्याय और कानून के मामलों में दक्ष, अर्थशास्त्री तथा कुशल प्रबंधन वाला होता है। ऐसे लोगों को माता-पिता का पूर्णसुख और अधिक संपत्ति मिलती है।

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एकादश भाव
इस भाव में बुध विराजमान हों तो जातक व्यापार के क्षेत्र में अच्छी सफलता हासिल करता है। कुशल प्रबंधन, प्रकाशन के क्षेत्र और कानूनी सलाहकार के रूप में ऐसे लोग अधिक सफल रहते हैं। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों और भाइयों से भी सहयोग मिलता है।

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astrology
द्वादश भाव
इस भाव में बुध विराजमान हों तो जातक अत्यधिक भागदौड़ करता है। वह कार्य कुशल होता है। विदेशी कंपनियों में नौकरी या विदेश से भाग्योदय की संभावना सर्वाधिक रहती है। स्वास्थ्य के प्रति ऐसे लोगों को निरंतर चिंतनशील रहना चाहिए।
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panna stone
बुध का मुख्य रत्न
इनके प्रभाव में सर्वाधिक वृद्धि करने वाला रत्न पन्ना है। यह हरे रंग का स्वच्छ, पारदर्शी, कोमल, चिकना व चमकदार होता है। विद्या बुद्धि धन एवं व्यापार के मामलों में इसे अत्यधिक लाभप्रद माना जाता है।

धारण विधि
पन्ना धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष में बुध के नक्षत्र अश्लेषा, जेष्ठा, रेवती अथवा बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी अंगुली में सोने की धातु में ॐ ब्रां, ब्रीं, ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र का जप करते हुए धारण करना चाहिए।
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