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Masik Kalashtami 2022: इन शुभ योग में मनाई जाएगी कालाष्टमी, जानिए महत्व, तिथि और पूजाविधि

Tue, 25 Jan 2022 10:11 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली

सार

Masik Kalashtami 2022: मान्यता है कि भगवान शिव की नगरी काशी की रक्षा वहां के कोतवाल बाबा काल भैरव ही करते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत करने से क्रूर ग्रहों का प्रभाव भी खत्म हो जाता है और ग्रह शुभ फल देना शुरू कर देते हैं। 
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Masik Kalashtami 2022 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Masik Kalashtami 2022: हिंदू पंचांग अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है। आज यानि 25 जनवरी को कालाष्टमी मनाई जा रही है। कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के अवतार काल भैरव की आराधना की अति है। काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु, मृत्यु के डर से मुक्ति, सुख, शांति और आरोग्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि भगवान शिव की नगरी काशी की रक्षा वहां के कोतवाल बाबा काल भैरव ही करते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत करने से क्रूर ग्रहों का प्रभाव भी खत्म हो जाता है और ग्रह शुभ फल देना शुरू कर देते हैं। आइए जानते हैं कालाष्टमी व्रत का महत्व, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में- 

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Masik Kalashtami 2022 - फोटो : facebook/rajinderbaiggi
कालाष्टमी व्रत का महत्व
कालाष्टमी का व्रत करने और काल भैरव की पूजा करने व्यक्ति को हर प्रकार के डर से मुक्ति मिलती है। उनकी कृपा से रोग-व्याधि दूर होते हैं। वह अपने भक्तों की संकटों से रक्षा करते हैं।  उनकी पूजा करने से नकारात्मक शक्तियां पास नहीं आती हैं। 

Masik Kalashtami 2022 - फोटो : अमर उजाला
कालाष्टमी तिथिः 
अष्टमी तिथि आरंभ:
25 जनवरी, मंगलवार, प्रातः 7:48 से 
अष्टमी तिथि समाप्त: 26 जनवरी, बुधवार,  प्रातः 6:25 तक 
कालाष्टमी शुभ योग  
कालाष्टमी पर द्विपुष्कर योग: प्रातः 7:13 से प्रातः 7:48 तक
कालाष्टमी पर रवि योग:  प्रातः 7:13 से   प्रातः10:55 तक  
शुभ मुहूर्त:  25 जनवरी, मंगलवार, दोपहर 12:12 से दोपहर 12:55 तक 
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Masik Kalashtami 2022 - फोटो : amar ujala
कालाष्टमी व्रत पूजा विधि
  • कालाष्टमी के दिन पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध करें। 
  • इसके उपरांत लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके उपरांत जल चढ़ाने के बाद पुष्प, चंदन, रोली अर्पित करें। 
  • इसके साथ नारियल, मिष्ठान, पान, मदिरा, गेरु आदि चीजें अर्पित करें। 
  • इसके उपरांत काल भैरव के समक्ष चौमुखा दीपक जलाएं और धूप-दीप कर आरती करें। 
  • इसके बाद शिव चालीसा और भैरव चालीसा या बटुक भैरव पंजर कवच का भी पाठ कर सकते हैं। 
  • रात्रि के समय काल भैरव की सरसों के तेल, उड़द, दीपक, काले तिल आदि से पूजा-अर्चना कर रात्रि में जागरण करें। 
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