मंगल ग्रह का रंग लाल है। यह लाल रंग का कारक भी है। इसलिए मंगल के दोष से बचने के लिए मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने का उपाय बताया जाता है। शास्त्रों में मंगल देव के लाल रंग के होने के पीछे की एक पौराणिक कथा का वर्णन मिलता है। जो इस प्रकार है..
यहां पर हुआ था मंगल देव जन्म
पुराणों के अनुसार उज्जैन नगरी को मंगल की जननी कहा जाता है। यानी कि मंगल देव का जन्म यहीं हुआ था। मंगलनाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसी मंदिर के ठीक ऊपर आकाश में मंगल ग्रह स्थित है। मत्स्यपुराण एवं स्कंदपुराण आदि में भी मंगल देव के संबंध में विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार उज्जैन में ही मंगल देव की उत्पत्ति हुई थी।
इसलिए है मंगल ग्रह लाल
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के अनुसार अंधकासुर नामक दैत्य को शिवजी ने वरदान दिया था कि उसके रक्त से सैकड़ों दैत्य जन्म लेंगे। वरदान के बाद इस दैत्य ने अवंतिका में तबाही मचा दी। तब दीन-दुखियों ने शिवजी से प्रार्थना की। भक्तों के संकट दूर करने के लिए स्वयं शंभु ने अंधकासुर से युद्ध किया। दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ।
मंगल ग्रह की धरती है लाल
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रक्त की बूंदों से उत्पन्न हुआ मंगल ग्रह
भीषण युद्ध में शिवजी का पसीना बहने लगा। रुद्र के पसीने की बूंद की गर्मी से उज्जैन की धरती फटकर दो भागों में विभक्त हो गई और मंगल ग्रह का जन्म हुआ। शिवजी ने दैत्य का संहार किया और उसकी रक्त की बूंदों को नव उत्पन्न मंगल ग्रह ने अपने अंदर समा लिया। कहते हैं इसलिए ही मंगल की धरती लाल रंग की है।