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ज्योतिषी गणना: सावधान ! कहीं होने वाली बहु की कुंडली में 'विषाख्या योग'' तो नहीं !

Thu, 13 Aug 2020 01:30 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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kundli milan - फोटो : अमर उजाला
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  • आज के परिवेश तथा बदलते सामाजिक समीकरण में शादी-विवाह के समय वर कन्या की जन्मकुंडली मिलान में सभी दोषों के साथ साथ दोनों   की जन्मकुंडली में विषकन्या योग का गहनता से विचार करना चाहिए। कुंडली विवेचन के समय अक्सर देखने में आया है कि शादी के कुछ ही दिनों में ससुराल में कोई बड़ी घटना हो जाती है अथवा पति-पत्नी एक दूसरे के लिए शत्रु बन जाते हैं। पत्नी सास-श्वसुर तथा पति को थाने पुलिस के चक्कर कटवाती है तो पति अपनी पत्नी के साथ क्रूरता का व्यवहार करता है। इस तरह के हालात पैदा होने पर किसी अच्छे ज्योतिषी से दोनों की कुंडलियों का फलादेश ज्ञात करना चाहिए। 

ज्योतिष में विषकन्या योग

  • वैदिक ज्योतिष में तिथि, वार तथा ग्रह-नक्षत्रों के संयोगों से निर्मित होने वाले शुभ-अशुभ योगों की संख्या हज़ारों में है। जिनमें गजकेसरी, हंस, भद्र, मालब्य एवं रुचक आदि जैसे अनेकों बड़े शुभफलदाई योग आते हैं, उसी प्रकार उपरोक्तइन्हीं संयोगों के द्वारा वैधव्य, वंशनाशक, ज्वालामुखी एवं विषकन्या आदि जैसे अति अशुभ योग भी बनते हैं। अंतर ये रहता है कि इन संयोगों के द्वारा बनने वाली युति शुभ है या अशुभ। जिस प्रकार शुभता में 'गजकेसरी योग' सर्वोपरि है उसी प्रकार अशुभता में 'विषकन्या योग' ! 
  • इस योग का दुष्प्रभाव भी इसके नाम के अनुरूप ही रहता है। जन्म के समय किसी भी जातक अथवा जातिका की जन्मकुंडली में यदि विषकन्या या विषपुरुष योग बना हो तो विवाह के समय इसकी गहनता से जांच कराकर उपाय करा लेना चाहिए अन्यथा दाम्पत्य जीवन में हानि तय रहती है। इन योगों को साधारण से साधारण विद्वान भी बता सकते हैं। इनमें भद्रा तिथियों, 'द्वितीया, सप्तमी' एवं द्वादशी तिथियों में जन्म लेने वाली कन्याओं का विचार अवश्य करना चाहिए। 

कुंडली में विषकन्या योग कब-कब 

  • किसी भी कन्या के जन्म के समय यदि रविवार का दिन हो। द्वितीया तिथि पड़ रही हो और आश्लेषा या शतभिषा नक्षत्र हों तो इन योंगों के मध्य जन्म लेने वाली कन्या को 'विषकन्या योग' में जन्मीं माना गया है। इसी प्रकार यदि कन्या के जन्म के समय द्वादशी तिथि हो, रविवार का दिन हो, कृतिका, विशाखा अथवा शतभिषा नक्षत्र हों तो भी 'विषकन्या योग' बनता है। अन्य संयोगों जैसे सप्तमी तिथि हो मंगलवार का दिन हो, आश्लेषा या विशाखा नक्षत्र हों तब भी कुंडली में 'विषकन्या योग' बनता है। 
  • सप्तमी या द्वादशी तिथि हो, शनिवार का दिन हो और कृतिका नक्षत्र हो तो इस योग में जन्म लेने वाली कन्या की कुंडली में भी 'विषकन्या' बनता है। शतभिषा नक्षत्र हो, मंगलवार का दिन हो द्वादशी तिथि हो तो इस योग में भी जन्म लेने वाली कन्याएं भी विषकन्या योग वाली होती है। 
  • उपरोक्त बताए गए योगों में जन्मी कन्याएं पति के लिए तो कष्टकारक होती ही है साथ ही ससुराल के अन्य सदस्यों के लिए भी अशुभ होती है। इस लिए इस तरह के योगों की जांच कराकर पहले उसकी शान्ति कराएं और फिर इसके बाद विवाह कार्य संपन्न करें तो दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। इतिहास एवं वैदिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीनकाल में बड़े-बड़े राजा भी अपने शत्रुओं का छलपूर्वक अंत करने के लिए वास्तविक 'विषकन्या' का प्रयोग किया करते थे।
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