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विजयादशमी 2018 : इन ग्रहों की शुभता से मिलती है शत्रुओं पर विजय

Fri, 19 Oct 2018 01:01 PM IST
-डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक
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दशहरा 2018
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आश्विन शुक्ल दशमी को मनाये जाने वाले त्यौहार को विजयादशमी या दशहरा कहा जाता है और यह त्यौहार वर्षा ऋतु के समापन का भी सूचक है। चौमासे में जो काम स्थगित किये होंगे, उनका शुभारम्भ आज के दिन से किया जा सकता है। श्री राम ने इस दिन रावण के अहंकार को चूर-चूर कर यह शिक्षा दी कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अहंकार लोभ-लालच और अत्याचारी प्रवृत्तियां त्यागकर मानवमात्र की सेवा के लिए जीवन जीना चाहिए।

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विजय का पर्व का ज्योतिषीय संबंध
इस समय राहु कर्क राशि में विराजित है तथा केतु और मंगल की मकर राशि में युति है। जबकि अभी-अभी गुरु का प्रवेश वृश्चिक राशि में हुआ है। इसका अभिप्राय यह हुआ कि यदि हम निम्न बातें संकल्पित कर लें, तो इस ज्योतिषीय संरचना का लाभ उठ सकते हैं।

- हम अपने क्रिया कलाप एवं संकल्प से रावण को इनमें से कोई शीस अपने पर थोपने नहीं देंगे। अर्थात इन सभी शीशों का दमन कर इनसे कम व उचित मात्रा में लाभ लेंगे।
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- अपने परिवार को अपने मित्रों से ऊपर रखेंगे।
- घर में अनुपालन योग्य अनुशासन बनाएंगे।
- आपस में घटने वाली घटनाओं को आपस में बाटेंगे।  
- भोजन साथ बैठकर करेंगे।
- घर में चीख - पुकार नहीं करेंगे।  
- बच्चों के सामने नहीं झगड़ेंगे।
- भाई-बहनों में प्रेमभाव बनाए रखेंगे।
- किसी बात को लेकर बहुत सख्त नहीं होंगे।
- परिवार में समभाव रखते हुए कोई भी परेशानी आपसी समझ से हल करेंगे।

अधिकांशत: राहु और केतु इन सब बातों को सही प्रकार से करने की अनुमति प्रदान नहीं करता। लेकिन यदि गुरु इन दोनों के मध्य पड़ जाए, तो लाभ की स्थिति बनती है। जो मैंने आपको ज्योतिषीय संरचना बताई यह लाभ-प्रद है और यदि हम संकल्प लेते हैं, तो उक्त बातों से लाभ प्राप्त हो सकता है।

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