सूरज के ढलते ही रिंग वाला सुंदर ग्रह शनि और सबसे विशाल ग्रह देवगुरु बृहस्पति को जोड़ी बनाते इस समय पश्चिमी आकाश में देखा जा सकता है। दोनों ग्रह मिलन को आतुर हैं। आने वाली हर शाम को यह नजदीकियां बढ़ती नजर आएंगी। आगामी 21 दिसंबर को जो साल की सबसे लंबी रात होगी तब ये दोनों ग्रह 0.1 डिग्री की दूरी पर दिखते हुये एक-दूसरे में मिलते हुए दिखाई देंगे। यानी साल की सबसे लम्बी रात को आसमान में गुरु-शनि का मिलन होगा। यह बड़ी खगोलीय घटना 400 साल बाद देखने का मिलेगी।
भोपाल की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि दो बड़े ग्रहों के पास दिखने की यह खगोलीय घटना ग्रेट कंजक्शन कहलाती है। पूर्णिमा का चंद्रमा जितना बड़ा दिखता है, उसके पांचवें भाग के बराबर इन दोनों ग्रहों के बीच की दूरी रह जाएगी।
सारिका ने बताया कि गैलीलियो द्वारा उसका पहला दूरबीन / टेलिस्कोप बनाये जाने के 14 साल बाद 1623 में यह दोनों ग्रह इतने करीब आये थे, उसके बाद इतना नजदीकी कंजक्शन अब 21 दिसम्बर 2020 को दिखने जा रहा है। आने वाले समय में इतना सामीप्य लगभग 60 साल बाद 15 मार्च 2080 को होने वाले कंजक्शन में देखा जा सकेगा।
सारिका ने बताया कि वैसे तो गुरु और शनि का यह मिलन हर 20 साल बाद होता है, लेकिन इतनी क़रीबी बहुत कम होती है। पिछला कंजक्शन वर्ष 2000 में हुआ था, लेकिन दोनों सूर्य के पास थे, इसलिये इन्हें देखना मुश्किल था।
सारिका ने जानकारी दी कि सूरज के ढलने पर दक्षिण की ओर चेहरा करके खड़े होकर अपनी दृष्टि पश्चिमी आकाश की तरफ करेंगे तो दोनों ग्रह एक दूसरे से जोड़ी बनाते नज़र आएंगे। इनमें से बड़ा चमकदार ग्रह बृहस्पति और उसके साथ का थोड़ा कम चमकदार ग्रह शनि होगा। लगभग 8 बजे ये जोड़ी अस्त हो जायेगी। इसलिये देर न करें और हर शाम इनके मिलन के गवाह बनें।
उन्होंने बताया कि पिछला कंजक्शन 31 मई 2000 को हुआ था, लेकिन तब सूर्य के नज़दीक होने के कारण इसे ठीक से नहीं देखा जा सका। अब अगले कंजक्शन 5 नवम्बर 2040, उसके बाद 10 अप्रैल 2060 और 15 मार्च 2080 को होंगे। इनमें 2080 वाला कंजक्शन 21 दिसम्बर 2020 को होने वाले कंजक्शन जैसा होगा।
क्यों होता है ग्रेट कंजक्शन
सौर मंडल का पांचवां ग्रह बृहस्पति और छटा ग्रह शनि निरंतर सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। गुरु की एक परिक्रमा लगभग लगभग 11.86 साल में हो पाती है तो शनि को लगभग 29.5 साल लग जाते हैं। परिक्रमा समय के इस अंतर के कारण लगभग हर 19.6 साल में ये दोनों ग्रह आकाश में साथ दिखने लगते हैं, जिसे ग्रेट कंजक्शन कहा जाता है।