वृषभ एवं तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह है
जिस प्रकार देवगुरु बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं, उसी प्रकार शुक्र असुरों के गुरु हैं इसीलिए किसी भी जातक की जन्मकुंडली में जब शुक्र और वृहस्पति एक साथ होते हैं तो ‘गुरुता योग’का निर्माण होता है। वृषभ एवं तुला राशि के स्वामी शुक्र मीन राशि में उच्चराशिगत और कन्या राशि में नीचराशिगत होते हैं । इनके द्वारा निर्मित 'मालव्य योग' पंचमहापुरुष योग में से एक है। विलासिता पूर्ण वस्तुओं, होटल्स, सौंदर्य प्रसाधन की सभी सामग्री, फिल्म उद्योग, गीत-संगीत लेखन, सौंदर्य प्रतियोगिताओं, एविएशन, भारी उद्योग, रसायन शास्त्र, न्यूरो सर्जरी से संबंधित शिक्षा, प्रेम विवाह, गुप्त रोगों एवं यौन संबंधी अन्य विकारों, संतान सुख, मांगलिक कार्यों, शिक्षा प्रतियोगिता की सफलता आदि के कारक कहे गए हैं। जन्मकुंडली में इनका स्थान अगर शुभ हो तो व्यक्ति जीवन के सारे ऐश्वर्य का भोग करता है किंतु अशुभ हो तो कहीं ना कहीं रिक्तता बनी रहती है। अकेले शुक्र ही ऐसे ग्रह हैं जो जन्मकुंडली के बारहवें व्ययभाव में भी अतिशुभ फल देते हैं। वर्तमान में इनके मीन राशि में गोचर के समय निर्मित होने वाले ‘मालव्य योग’ का निर्माण हो रहा है।