शुक्र सुख और वैभव प्रदान करने वाले ग्रह माने जाते हैं। 4मई की रात में 12 बजकर 41 मिनट पर यह मेष राशि से निकलकर अपनी राशि वृष में पहुंच चुके हैं। इस राशि में शुक्र 29 मई तक रहेगा। ज्योतिष विशेषज्ञ जयगोविंद शास्त्री बताते हैं। वृष राशि में शुक्र के पहुंचने से गुरूघंटाल नामक योग बन रहा है।
यह योग व्यक्ति में अहं की भावना बढ़ाता है। जिन लोगों की कुण्डली में गुरू और शुक्र साथ बैठे हैं उन्हें इन दिनों अपने आप पर नियंत्रण रखना चाहिए अन्यथा अहं के कारण रिश्ते बिगड़ सकते हैं और खुद का नुकसान हो सकता है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करलें।
वैसे बुध के मेष में आने के बाद शुक्र का राशि परिवर्तन शुभसंकेत है। इनका राशि परिवर्तन ज्ञान-विज्ञान एवं शिक्षा के क्षेत्र अधिक बढ़ावा देनेवाला सिद्ध होगा। इस अवधि में इन ग्रहों से प्रभावित विद्यार्थियों को शिक्षा, परीक्षा और प्रतियोगिता में भाग लेने और उसमे सफलता प्राप्ति के योग हैं। सफलता का ग्राफ ऊपर उठेगा।
एक ज्योतिषीय शोध के अनुसार शुक्र जब भी बृष, तुला और मीन राशि में होते हैं तब जीवों का प्रादुर्भाव अधिकाधिक संख्या में होता है। इसलिए संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को इस अवसर का लाभ मिलेगा। व्यापार की दृष्टि से शुक्र भारी उद्योग, सोने, चांदी, प्लेटिनियम, समुद्री वस्तुओं, खाद्यपदार्थों, पेयपदार्थों, एवं विलासिता की वस्तुओं के कारक होते है अतः इन दिनों इन क्षेत्रों में लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।
शुक्र-गुरु का मेल आठ राशियों मेष, बृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, बृश्चिक, मकर, कुंभ के लिए अति शुभ फलदायी रहेगा। मिथुन, तुला, धनु एवं मीन राशि के जातकों के लिए सामान्य होगा।