सूर्य देव बीते एक महीने से अपने शत्रु राशि वृष में चल रहे थे। 14 तारीख की मध्य रात्रि के बाद सूर्य इस राशि से निकलकर बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। शुक्र के मिथुन राशि में पहुंचने आषाढ़ संक्रांति होगी। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस संक्रांति का नाम घोरा है।
मिथुन राशि में सूर्य के पहुंचने से चतुर्ग्रही योग बनेगा क्योंकि गुरू, बुध और शुक्र पहले से मिथुन राशि में मौजूद है। ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा के अनुसार यह संक्रांति मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक एवं कुंभ राशि वालों के लिए लाभप्रद रहेगी।
इस संक्रांति का प्रभाव है कि अपराधों के प्रति सरकार अधिक संवेदनशील होगी और इन्हें रोकने के विषय पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। सरकार और सरकारी तंत्र के लिए यह महीना राहत भरा होगा। सरकारी विरोधी गतिविधियों जैसे, हड़ताल, प्रदर्शन में कमी आएगी। किसी बड़े साजिश का खुलासा हो सकता है।
राजनीतिक दल लोकतांत्रिक मर्यादा का ध्यान रखेंगे। सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दों पर आपसी सहयोग के लिए साथ आएंगे। जातिवादी राजनीति से हटकर नेता अपनी छवि सुधारने का प्रयास करेंगे।
संक्रांति का स्नान दान शनिवार 15 जून को सूर्योदय से 11 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।