देश की राजनीति में इन
दिनों भूचाल आया हुआ है। यूपीए की प्रमुख सहयोगी ममता बनर्जी सरकार से अलग हो चुकी
है। आए दिन नए घोटाले से सरकार की फजीहत हो रही है और राजनीति की बिसात पर विपक्षी
दल मनमोहन सरकार को पटखनी देने की कोशिश में लगे हुए हैं। इससे मनमोहन सिंह की
मुश्किलें बढ़ गयी है और सत्ता पर पकड़ बनाये रखने के लिए इन्हें काफी मशक्कत करनी
पड़ रही है। मनमोहन की परेशानी की असली वजह है वर्तमान में चल रही ग्रहों की दशा।
इन दिनों शनि और मंगल की युति चल रही है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि और
मंगल की युति षड्यंत्रकारी और उथल-पुथल मचाने वाली होती है। इन दोनों ग्रहों के
प्रभाव के कारण ही सरकार संकट में घिरी हुई है। 28 सितम्बर को मंगल तुला राशि से
निकलकर वृश्चिक राशि में पहुंच रहा है। इससे राहु मंगल की युति बनेगी।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु मंगल के संबंध से अंगारक योग बनता है। इस
योग के कारण संकट में घिरी सरकार की स्थिति और खराब हो सकती है। विपक्षी दलों का
तेवर कड़ा होगा और सहयोगी दलों से विरोध के स्वर फूटेंगे। जन आन्दोलन एवं सरकार
विरोधी आवाजें देश में गूंजेंगी।
आगे 16 अक्तूबर को सूर्य कन्या राशि से
निकलकर शनि के साथ युति करेगा। शनि सूर्य की युति भी सरकार के लिए संकटकारी है।
ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि रविवार के दिन संक्रांति आना शुभ नहीं होता है।
ऐसी स्थिति में राजनेताओं में परस्पर टकराव होता है। अनाज मंहगे होते है और जनता
कष्ट से व्याकुल होती है। 16 सितम्बर को रविवार के दिन आश्विन संक्रांति हुई है जो
सरकार के लिए दुःखदायी और जनता के लिए कष्टकारी रही है।
पंडित विनोद त्यागी
कहते हैं कि 23 अक्तूबर को बुध वृश्चिक राशि में पहुंचेगा। बुध का वृश्चिक राशि में
पहुंचना सरकार को राहत दे सकता है।