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मोदी की कुंडलीः मंगल है तो भला कौन कर सकता अमंगल

Tue, 17 Sep 2013 11:42 AM IST
टीम डिजिटल
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गुजरात चुनाव में तीसरी बार विजय का परचम लहराने के बाद मोदी ने अपनी आंखें दिल्ली की गद्दी पर गड़ा दी हैं। ग्रहों की स्थिति भी ऐसा ही संकेत दे रही है कि आने वाले साल में मोदी दिल्ली के लाल किला पर तिरंगा लहराएंगे।
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नरेंद्र मोदी का जन्म 1950 में 17 सितंबर यानी आज के ही दिन हुआ था। इनके जन्म के समय चन्द्रमा और मंगल दोनों ही कुण्डली के पहले घर में वृश्चिक राशि में बैठे हैं। जबकि ग्यारहवें घर में सूर्य बुध, केतु एवं नेप्चयून के साथ बैठा है। गुरु महाराज चौथे घर में शुक्र और शनि के आमने-सामने बैठे हैं।

मोदी की कुण्डली में बने शुभ योग
ग्रहों की इस स्थिति के कारण मोदी की कुण्डली में कई शुभ योग बने हुए हैं। जैसे गजकेसरी योग, मूसल योग, केदार योग, रूचक योग, वोशि योग, भेरी योग, चंद्र मंगल योग, नीच भंग योग, अमर योग, कालह योग, शंख योग तथा वरिष्ठ योग।
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मोदी पर तो मंगल मेहरबान है इस हफ्ते आपके सितारे क्या कहते हैं

इन शुभ ग्रहों के प्रभाव के कारण ही नरेंद्र मोदी को आज भाजपा में सबसे वरिष्ठ पद पर पहुंचने का मौका मिला है। ज्योतिषशास्त्री चन्द्र प्रभा बताती हैं कि इतने सारे उत्तम योग बहुत ही भाग्यवान व्यक्ति की कुण्डली में मौजूद होते हैं।

मंगल की मेहरबानी
मोदी इन दिनों शनि में मंगल की दशा के प्रभाव में हैं। मंगल की यह दशा 2014 के अक्टूबर माह तक रहेगी। मंगल इनका लग्न स्वामी है और अपने ही घर में बैठा है जिससे मोदी आत्मबल और साहस से अपने विरोधियों को मात देते हुए आगे बढ़ते जाएंगे। मंगल की इसी स्थिति के कारण मोदी अपने विरोधियों को कभी माफ नहीं कर पाते। मौका मिलने पर विरोधियों से बदला जरूर लेते हैं।

मोदी की साढ़ेसाती
इन दिनों मोदी साढ़ेसाती के प्रभाव में भी चल रहे हैं इसलिए अपनी मंजिल को पाने के लिए इन्हें काफी परिश्रम करना होगा। 2014 के बाद शनि जब इनकी राशि में आएगा तब इनकी उलझन और परेशानियों में वृद्घि होगी। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

मुफ्त में शनि को खुश करने के आसान उपाय

मोदी के पारिवारिक जीवन की बात करें तो इनकी कुण्डली में मांगलिक योग बना हुआ है साथ ही विवाह स्थान का कारक शुक्र शनि के साथ शत्रु स्थान में बैठा है जो वैवाहिक जीवन के लिए अनुकूल स्थिति नहीं है। जबकि निकट संबंधियों से दूरियों का कारण शनि है जो भाई-बहन के घर का स्वामी होकर अपने से आठवें घर में बैठा है।
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