इस बार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ने वाली करवा चौथ का विशेष महत्व है। 36 वर्षों के बाद इस बार करवा चौथ पर तीन विशेष योग बन रहे हैं।
चंद्रमा की 27 पत्नियां मानी जाती हैं। इनकी सभी पत्नियां नक्षत्र हैं। सभी पत्नियों में चन्द्रमा को रोहिणी सबसे प्रिय हैं। करवाचौथ के अवसर पर इस वर्ष चन्द्रमा अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होगा। जिससे चन्द्रमा का दर्शन अति कल्याणकारी होगा।
चन्द्र रोहिणी के संयोग के साथ इस वर्ष मार्कंडेय और सत्यभामा योग भी बन रहा है, जिससे इस वर्ष करवा चौथ का महत्व कुछ और बढ़ गया है।
भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के निदेशक डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार मार्कंडेय योग, सत्यभामा योग एवं रोहिणी योग का अद्भुत संयोग 36 वर्ष पूर्व हुआ था। माना जाता है कि यही विशिष्ट योग उस समय बना था जब भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा का मिलन हुआ था।
डा. मिश्रपुरी के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देते समय यदि महिलाएं सत्यभामा, मार्कंडेय और रोहिणी को भी अर्घ्य प्रदान करेंगी, तो उनका दांपत्य जीवन और भी प्रेम और सद्भाव बढ़ेगा। करवा चौथ के दिन स्त्रियों को श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को याद करते हुए रुक्मिणी मंगल का पाठ करना चाहिए। गंगा सभा विद्वत परिषद के सदस्य पंडित संजीव शास्त्री के अनुसार इस बार करवा चौथ का चंद्रमा विशेष शांति प्रदान करने वाला है। यह चंद्र दांपत्य जीवन को सुख प्रदान करेगा। करवा चौथ की रात्रि में हरिद्वार सहित उत्तराखंड में चंद्र दर्शन रात्रि 8.06 बजे होगा।