मई महीना समाप्त होने जा रहा है और इसके साथ ही गुरू का वृष राशि में रहने का समय भी समाप्त हो रहा है। 31 मई को सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर गुरू वृष राशि से निकलकर मिथनु राशि में पहुंच जाएगा। गुरू का अपने शत्रु राशि में आना नक्सलवादी एवं पृथकतावादी आन्दोलन को तेज करेगा।
कोई बड़ा ग्रह जब राशि बदलता है तब उसका असर पहले से ही दिखने लगता है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले को अंजाम दिया गया। इस हमले का एक कारण मंगल का शनि के साथ बनने वाला षड्ष्टक संबंध भी है।
सत्ता से बाहर हो सकती है यूपीए सरकार
मिथुन राशि में गुरू 2014 जून तक रहेगा। इस दौरान लोकसभा का चुनाव भी होना है जो वर्तमान केन्द्र सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं है। केन्द्र सरकार के गंठबंधन में दरारें आएंगी।
सहयोगी दल सरकार से दूरियां बना लेगी। वर्तमान केन्द्र सरकार को चुनाव आने तक नित नई समस्याओं का सामना करना होगा। इस बीच कई भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में सरकार घिरती नज़र आएगी।
चुनाव का परिणाम अप्रत्याशित होगा जिससे विश्लेषक भी हैरान होंगे। राज्य स्तर पर भी राजनीतिक दलों में अनुशासनहीनता और प्रशासन में अव्यवस्था की स्थिति बनी रहेगी।
महंगाई में कमी
आर्थिक दृष्टि से गुरू का यह गोचर कोई बड़ी क्रांति नहीं लाने वाला है। बैंकिग एवं फाईनेंस के क्षेत्र में स्थिति थोड़ी मजबूत होगी। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्घि से आर्थिक गतिविधि तेज होगी।
महंगाई से पीड़ित जनता को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि जमीन स्तर की बजाय कागजी आंकड़े में महंगाई में कमी अधिक नज़र आएगी। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को राहत देने के लिए सरकार की ओर से कुछ सामाजिक कल्याण की कुछ नई योजनाओं पर कार्य किया जा सकता है।
सामाजिक स्तर में सुधार
साल का राजा गुरू है। गुरू का मिथुन में जाना सामाजिक व्यवस्था में सुधार का संकेत है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की ओर सरकार एवं समाज दोनों का दृष्टिकोण अधिक सकारात्मक होगा।
इस संदर्भ में कुछ नये कानून एवं नई व्यवस्था की शुरूआत हो सकती है। महिलाओं के अधिकारों में वृद्घि होगी। लोगों में धर्म-कर्म के प्रति जागरूकता बढ़ेगी लेकिन धर्म के नाम पर लोगों को ठगने वाले धर्म गुरूओं पर से लोगों का विश्वास कम होगा।