रूद्राक्ष को शिव का स्वरूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रूद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति नकारात्मक उर्जा के प्रभाव से मुक्त रहता है। रूद्राक्ष जाबलोपनिषद् में लिखा गया है कि रूद्राक्ष की चर्चा करने मात्र से दस गायों के दान करने का पुण्य प्राप्त होता है जबकि इसे धारण करने से दो हजार गायों के दान का पुण्य प्राप्त होता है।
रूद्राक्ष के प्रति लोगों की आस्था का फायदा उठाने के लिए आज कल नकली रूद्राक्ष भी बाजार में मिल रहे है। खरीदते समय ठगे जाने से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। नकली रूद्राक्ष की सबसे पहली पहचान यह है कि उसके ऊपर उभरे हुए पठार एक समान दिखते हैं। असली रूद्राक्ष के पठार एक समान नहीं होते हैं इनमें काफी विभिन्नता होती होती है। असली रूद्राक्ष के मुंह के पास पठार उभरे हुए होते हैं।
रूद्राक्ष को किसी नुकीली चीज से खरोंचने पर रेशा निकलता है। अगर यह प्लास्टिक का होगा तो रेशा नहीं निकलेगा। अगर आप एकमुखी रूद्राक्ष खरीद रहे हैं तो गौर से देखने पर आपको नेत्र या त्रिशूल का चिन्ह नज़र आएगा। गौरीशंकर रूद्राक्ष की कीमत अधिक होती है इसलिए इन दिनों रूद्राक्ष बेचने वाले दो रूद्राक्षों को चिपकाकर गौरीशंकर रूद्राक्ष बना देते हैं। इसकी पहचान का आसान तरीका यह है कि इसके ऊपर चुम्बक रखें। अगर लोहे के बुरादों अथवा कील से इसे चिपकाया गया है तो रूद्राक्ष चुम्बक से चिपक जाएगा।
ऐसे रूद्राक्ष की पहचान का एक और तरीका यह है कि इसे पानी में रखकर कुछ देर तक उबालें। इसके बाद इसे ठंडा होने दें। अगर किसी चीज से रूद्राक्ष को चिपकाया गया होगा तो वह हट जाएगा। इन दिनों रूद्राक्ष पर सांप और शिवलिंग की आकृति भी बनी हुई मिलती है। इस उपाय से ऐसे रूद्राक्ष की भी जांच की जा सकती है जिनपर ऐसी नकली आकृति बनी होती है।
बहुत से लोग तीर्थ स्थानों पर रूद्राक्ष खरीदना पसंद करते हैं लेकिन यह ठीक नहीं है। ऐसे स्थानों पर पर्यटक समझकर रूद्राक्ष बेचने वाले नकली रूद्राक्ष पकड़ा देते हैं। सबसे अच्छा तरीका यह है कि रूद्राक्ष को किसी प्रमाणित और विश्वसनीय जगह से लें।