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ग्रहों का योग भी बना सकता है निराशावादी

Wed, 26 Dec 2012 04:06 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
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जिन्दगी में कामयाबी के लिए सकारात्मक सोच का होना बहुत ही आवश्यक होता है। जो व्यक्ति आशावादी होते हैं वह मुश्किल से मुश्किल हालात का सामना आसानी से कर लेते हैं। लेकिन जो लोग निराशावादी होते हैं वह छोटी से छोटी समस्या को समाने देखकर घबरा जाते हैं। ऐसे लोग साहसिक कदम उठा नहीं पाते हैं इसलिए इनकी सफलता की रफ्तार धीमी होती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कई बार कुण्डली में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति को आशावादी और निराशावादी बनाती है। इसके लिए चन्द्रमा एवं राहु विशेष रूप से जिम्मेदार होते हैं।
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स्मरण क्षमता में कमी
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्रमा और राहु एक ही घर में साथ-साथ होते हैं। उनकी कुण्डली में ग्रहण योग बनता है। यह योग जिनकी कुण्डली में होता वह निराशावादी होते हैं। ऐसे व्यक्ति की याद्दाश्त कमज़ोर होती है। इनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होती है जिससे छोटी-छोटी बातों को लेकर यह तनाव में आ जाते हैं। ऐसे लोगों को नेत्र संबंधी रोग होने की आशंका रहती है। अगर राहु के साथ चन्द्रमा पहले अथवा आठवें घर में होता है तो व्यक्ति को मिरगी एवं दूसरे मानसिक रोग होने की भी संभावना रहती है।

कैरियर में बाधक राहु
जिस व्यक्ति की कुण्डली में एक ही घर में सूर्य, चन्द्र एवं राहु साथ होते हैं उनकी कुण्डली में ग्रहण योग का प्रभाव अधिक होता है। इन्हें कैरियर में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अकारण ही किसी बात को लेकर भयभीत रहते हैं। जीवन में कई बार गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। सूर्य एवं चन्द्र के साथ जब भी राहु की दशा चलती है, वह समय इनके लिए कष्टकारी होता है।
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पिता के सुख में कमी
कुण्डली में सूर्य के साथ राहु होने पर भी ग्रहण योग बनता है। यह ग्रहण योग जिनकी कुण्डली में होता है वह किसी विषय पर गंभीरता से विचार किये बिना कार्य बैठते हैं जिसका इन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे लोग भी विषयों को अधिक समय तक याद नहीं रख पाते हैं। पिता से प्राप्त होने वाले सुख एवं सहयोग में कमी आती है। ऐसे लोग पैतृक स्थान से दूर जाकर कैरियर बनाते हैं।
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