आपने अनुभव किया होगा कि कई
बार कोई काम करने की कोशिश करने पर बिना बाधा के काम सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है।
जबकि कुछ समय ऐसा होता है जब कोई काम शुरू किया जाए तो आसान दिखने वाला काम भी
उलझने लगता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह सब समय का प्रभाव होता है।
पुराणों के अनुसार 24 घंटे में कुछ समय सभी दोषों से मुक्त रहता है जिसे अभिजित
मुहूर्त के नाम से जाना जाता है। यह मुहूर्त मध्याह्न से लगभग आधा घंटा पहले और आधा
घंटा बाद तक होता है।
लंबे समय तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिलने पर
अभिजित मुहूर्त में विवाह भी किया जा सकता है। इस अवधि में कोई शुभ तिथि और मुहूर्त
देखने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस समय को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के समान सभी
अशुभ प्रभाव को दूर करने वाला बताया गया है।
जबकि हर दिन डेढ़ घंटे का समय
ऐसा होता है जब न तो कोई शुभ काम शुरू करना चाहिए और न इस दौरान धन का लेन-देन करना
चाहिए। माना जाता है कि इस समय शुरू किये गये कार्य में बाधाएं आती हैं। कार्य का
शुभ परिणाम प्राप्त नहीं होता है। इस अशुभ समय को पंचांग राहुकाल कहता है।
हर दिन राहुकाल का समय
सोमवारः प्रातः काल 6 बजकर 30 मिनट से 9 बजे
तक।
मंगलवारः दोपहर 3 बजे से 4बजकर 30 मिनट तक।
बुधवारः 12 बजे से लेकर 1
बजकर 30 मिनट तक।
गुरूवारः 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक।
शुक्रवारः 10 बजकर
30 मिनट से 12 बजे तक।
शनिवारः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक।
रविवारः शाम 4
बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक।