ज्योतिषशास्त्र में अश्लेषा नक्षत्र को नौवां नक्षत्र कहा गया है। जिन व्यक्तियों का जन्म इस नक्षत्र में होता है उन पर जीवनभर राहु और बुध का प्रभाव होता है। यह काफी बुद्घिमान और महत्वाकांक्षी होते हैं। राहु के प्रभाव के कारण ऐसे व्यक्ति राजनीतिक दांव-पेच एवं कूटनीति चालें चलना बखूबी जानते हैं। दुश्मनों से भी अपना काम बड़ी चतुराई से निकलवा लेते हैं।
इनमें समय की नब्ज पकड़ने की क्षमता होती और अपने सामने वाले व्यक्ति को पढ़ना भी जानते हैं इसलिए समय और परिस्थिति के अनुसार खुद को आसानी से ढ़ाल लेते हैं। अपनी इस खूबी के कारण यह काफी तरक्की करते हैं लेकिन उम्र के 35वें वर्ष में इन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए इस उम्र में आर्थिक मामलों में इन्हें सावधान रहना चाहिए। वैसे 40वें वर्ष में भाग्य फिर से इनका साथ देता है और आर्थिक नुकसान की भरपाई कर लेते हैं।
अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे लोग ऊपरी तौर पर धर्म-कर्म एवं अध्यात्म में बहुत रूचि लेते हैं और दूसरों को आध्यात्मिक ज्ञान भी देते हैं लेकिन अंदर से भौतिक सुख-सुविधाओं की इनमें गहरी ललक रहती है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वालों की एक बड़ी खूबी यह होती है कि हमेशा किसी न किसी काम में खुद को व्यस्त रखते हैं।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरूष में एक बड़ी कमी यह होती है कि यह अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। जिसके कारण अपने करीबी लोगों के भी विश्वास खो देते हैं। इसके विपरीत इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली महिलाएं परिवार एवं समाज में सम्मान प्राप्त करती हैं। अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को संयम से काम लेना चाहिए अन्यथा यह नीशीली चीजों के जल्दी आदी हो जाते हैं। इन्हें जोड़ों में दर्द, पीलिया, हिस्टीरिया जैसे रोग होने की आशंका रहती है।