दशहरा के दिन न करें इन चीजों का दान
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Dussehra 2024 Daan: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान राम द्वारा रावण का वध किया गया था, इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। दशहरा के दिन शस्त्रों की पूजा करने का भी विधान है। माना जाता है कि शस्त्रों की पूजा करने से बुरी शक्तियों का नाश हो जाता है। वहीं दशहरा के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। इसे रावण के अहंकार और बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं, दशहरा के दिन सैनिक और पुलिसकर्मी अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं। मान्यताओं के अनुसार दशहरा के दिन कुछ चीजों का दान करना अशुभ माना जाता है। इसलिए आपको इस दिन इन चीजों का दान भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
चमड़े के चीजों का दान
सनातन धर्म में पशुओं को पवित्र माना जाता है और चमड़ा पशुओं की खाल से ही बनता है। ऐसे में चमड़े की चीजों का दान करना पशुओं के प्रति सम्मान न दिखाना दर्शाता है। दशहरा शुद्धता और पवित्रता का पर्व है, इसलिए चमड़ा अशुद्ध माना जाता है। इसलिए दशहरा के दिन चमड़े की चीजों का दान करना शुद्धता के विरुद्ध है। ऐसा करने से आपको अशुभ फल मिल सकते हैं।
धारदार चीजों का दान
माना जाता है कि धारदार चीजों का दान करने से घर में कलह, तनाव और असहमति जैसी स्थिति पैदा होती है। कहा जाता है कि ये चीजें नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और परिवार के बीच संबंधों में तकरार पैदा कर सकती है। धारदार चीजों का दान करने से घर में धन की हानि भी होती है। साथ ही ये चीजें लक्ष्मी माता को नाराज करती हैं, जिसकी वजह से घर से धन भाग जाता है। इसलिए इन्हें दशहरा के दिन दान करना या लेना अशुभ माना जाता है।
हल्दी का दान
हिंदू धर्म में हल्दी का संबंध गुरु ग्रह से जोड़ा गया है। माना जाता है कि शाम के समय हल्दी दान करने से गुरु ग्रह कमजोर हो सकता है, जिसकी वजह से व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। शाम के समय हल्दी दान करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, जिससे घर में कलेश हो सकता है। वैसे तो हल्दी को शुभ माना जाता है, लेकिन शाम के समय इसे दान करना अशुभ होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।