मंत्र जप से दूर करें ग्रहों का दोष
1. सूर्य —
जीवन में सुख-संपत्ति और साहस को कायम रखने के लिए सूर्यदेव की कृपा पाना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य की दशा न सिर्फ उसकी सेहत, संपत्ति एवं सुख-शांति पर असर डालती है बल्कि उसे राजा से रंक बनाने का भी माद्दा रखती है। जन्मांग में ग्रहों का राजा यदि सूर्य मजबूत अवस्था में हो, तो जातक राजा, मंत्री, सेनापति, प्रशासक, मुखिया, धर्म संदेशक आदि बनाता है। लेकिन यदि सूर्य कुंडली में निर्बल अवस्था में हो तो वह शारीरिक तथा सफलता की दृष्टि से बड़ा ही खराब परिणाम देता है।
सूर्यदेव की शुभता बढ़ाने और उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कभी भी झूठ न बोलें। इस उपाय को करने से सूर्य से संबंधी दोष दूर हो जायेगा और उनके शुभ फल मिलने प्रारंभ हो जाएंगे। साथ ही प्रतिदिन उगते सूर्य का दर्शन एवं उन्हें
'ॐ घृणि सूर्याय नम:' कहते हुए जल अर्पित करना चाहिए। प्रतिदिन सूर्य को जल देने के पश्चात् लाल आसन में बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके निम्न मंत्र का 108 बार जप करें —
''एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।''
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