जब किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह कमजोर होता है या अशुभ प्रभाव देता है तो उसे रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। रत्न धारण करने से व्यक्ति पर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में रत्न पहनने से पहले कुछ नियम बताए गए है जिसका जरूर ध्यान देना चाहिए।
रत्न का ग्रहों से संबंध
ज्योतिष में नौ ग्रहों के लिए नौ रत्न पहने जाते हैं। सूर्य के लिए माणिक रत्न, चन्द्रमा के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना, गुरु के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा, शनि के लिए नीलम, राहु के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनियां पहनना चाहिए।
रत्न कब ना करें धारण
- अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन कभी भी रत्न धारण नही करना चाहिए।
- 4, 9 और 14 तिथि पर भी कभी रत्न नहीं पहनना चाहिए।
- कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से शुक्लपक्ष की द्वितीया तक रत्न नहीं धारण करना चाहिए।
- जिस ग्रह का रत्न धारण करना है वह ग्रह गोचर में अस्त न हुआ हो।
- मलमास, श्राद्धपक्ष, अधिमास में रत्न नहीं धारण करना चाहिए।
इन नक्षत्रों में रत्न धारण करना शुभ
रेवती, अश्विनी, रोहिणी, चित्रा, स्वाति और विशाखा नक्षत्र में धारण करें तो विशेष शुभ माना जाता है।